चंपावत। राष्ट्रीय राजमार्ग से तकरीबन ढाई सौ मीटर नीचे बचाव कर्मियों और स्थानीय लोगों को देख खाई में पड़े घायल यात्रियों के मुंह से पानी पानी पानी....ही शब्द निकल रहे थे। यात्रियों की चीख को अनसुना कर बचाव कर्मियों ने दिल पर पत्थर रख कर बचाव कार्य शुरू किया। दरअसल बचाव कर्मी जानते थे दुर्घटना के बाद घायलों को पानी नहीं दिया जाता। तकरीबन ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी पांचों घायलों को सड़क तक पहुंचाया जा सका।
शनिवार को दोपहर के तकरीबन सवा बारह बज रहे थे। छतकांडा के पासस यात्रियों से भरी बोलेरो अचानक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। वाहन पहली पलटी खाकर खाई की दीवार से जा टकराया। इसके बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहन कुछ देर हवा में लहराने और पेड़ से टकराने के बाद बड़े-बड़े पत्थरों में पलटियां खाते हुए ढाई सौ मीटर नीचे नाले में समा गया। गहरी खाई यात्रियों की चीख पुकार से दहल गई। खाई में जगह-जगह पड़े घायल और मृत यात्रियों तक पहुंचने में स्थानीय लोगों को आधा घंटे का वक्त लग गया।
खाई में सबसे पहले पहुंचे अमोड़ी निवासी शंकर दत्त, बंशीधर, भोला दत्त, लक्ष्मी दत्त और चूड़ामणी ने बताया कि उन्हें देखते ही घायल यात्रियों ने पानी मांगा, लेकिन उन्होंने घायलों इस बात को दरकिनार करते हुए राहत अभियान शुरू कर दिया। वाहन से छिटक कर खाई में अटके ग्यारह साल के रामनाथ को सबसे पहले सड़क तक पहुुंचाया गया। इस बीच पुलिस और अन्य बचाव कर्मी भी खाई में पहुंच चुके थे। ढाई घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद एक महिला समेत तीन अन्य घायल पुरुषों को सड़क तक पहुंचाया गया। पांचों घायलों को जिला अस्पताल भेजने के बाद मृत यात्रियों को खाई से निकालने का सिलसिला शुरू हुआ।