चंपावत। डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने कहा है कि जिले में कक्षा 12 तक अध्ययन कर रही बालिकाओं के हिमोग्लोबिन जांच की जाएगी। मार्च अंतिम सप्ताह तक एक रणनीति तैयार कर मिजिल्स रूबेला टीम की तरह हिमोग्लोबिन की जांच की जाएगी और हिमोग्लोबिन कम पाए जाने वाली छात्राओं को चिन्हित किया जाएगा। इस संबंध में बृहस्पतिवार को जिला कार्यालय सभागार में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि परिवार में बेटियों को बेटों के बराबर का दर्जा प्राप्त हो इसके लिए उनके खानपान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जांच में जिन बालिकाओं में हिमोग्लोबिन की मात्रा कम पाई जाएगी, उनको चिकित्सा विभाग की देखरेख में दवाओं का वितरण किया जाएगा। डीएम ने एक ही परिवार के सरकारी व प्राईवेट विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का डाटाबेस भी तैयार करने को कहा।
उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को नारी चौपाल, बेटी जन्मोत्सव, बेबी शो कार्यक्रमों के साथ-साथ फोकस ग्रुप तैयार करने और महिलाओं की गोष्ठियां कराने को कहा। जिला कार्यक्रम अधिकारी कामिनी गुप्ता ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के संचालन के लिए चिकित्सा विभाग को 7.70 लाख रुपये तथा शिक्षा विभाग की ओर से पांच लाख रुपये की धनराशि प्रस्तावित की है। जिस पर टास्क फोर्स समिति की ओर से बजट को अनुमोदित किया गया। बैठक में सीडीओ एसएस बिष्ट, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.एमएस बोरा, उप शिक्षा अधिकारी अंशुल बिष्ट सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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गुड्डा-गुड्डी बोर्ड बनाने के प्रस्ताव पर असहमति
चंपावत। मुख्य विकास अधिकार एसएस बिष्ट ने ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विकासखंडों में गुड्डा-गुड्डी बोर्ड बनाने के प्रस्ताव पर असहमति जताई। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को उससे ऊपर सोचने और कुछ अभिनव प्रयास करने को कहा।
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नवविवाहितों का रिकार्ड भी रखने पर जोर
चंपावत। डीएम ने जिला कार्यक्रम अधिकारी से नवविवाहितों का रिकार्ड भी क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से रखने पर जोर दिया। कहा जिससे कन्या भ्रूण हत्या पर चिकित्सा विभाग के माध्यम से नजर रखी जा सकेगी। उन्होंने सभी विभागों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत एक माह में माइक्रो प्लान उपलब्ध कराने को कहा।