पहाड़ और मैदान से मिलकर बने चंपावत जिले के कई हिस्सों में इमरजेंसी के वक्त कायदे की चिकित्सा सेवा नहीं है। सड़क अथवा किसी दूसरी तरह के हादसे सहित विभिन्न इमरजेंसी में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के 75 किलोमीटर हिस्से में यहां आपात चिकित्सा सेवा 108 नहीं है। इस कारण सड़क दुर्घटना के वक्त जीवन बचाने को भारी संकट झेलना पड़ता है।
30 मई को एनएच पर यहां से 28 किलोमीटर दूर अमोड़ी के पास हुए सड़क हादसे में एक की मौत और एक घायल हुआ। इसी तरह 5 जुलाई को एनएच पर भारतोली के नजदीक जीप के खाई में गिरने से तीन लोगों की मौत और दस जख्मी हो गए थे। लेकिन एनएच में इमरजेंसी में इलाज देने लायक न कोई अस्पताल है और न ही आपात चिकित्सा सेवा 108 है। इस कारण घायलों तक पहुंच बनाने में देरी हुई और ये विलंब जानलेवा साबित हुआ। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी, क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य उमाशंकर भट्ट, दीपक बोहरा सहित इलाके के लोग हाईवे में अमोड़ी और बाराकोट में एक-एक 108 सेवा की मांग करते रहे।
उनका कहना है कि टनकपुर से चंपावत के बीच के 75 किमी हिस्से में आपात सेवा नहीं होने से इमरजेंसी में चंपावत या टनकपुर की शरण लेना पड़ता है। इसी तरह बाराकोट के लोग भी संकट के वक्त मदद के लिए 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट की ओर ताकने को मजबूर हैं। ऐसे में हादसों में यहां कई मौतें हो चुकी हैं। लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का कहना है कि आपात सेवा 108 के लिए कई बार आवाज उठाई गई। पर सरकार इसकी अनदेखी कर रही है। उनका कहना है कि अब मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा।
हर 108 सेवा में सभी जरूरी सुविधाएं हैं। इमरजेंसी मेडिकल टैक्निशियन की देखरेख में 108 सेवा में ले जाने वालों की देखरेख होती है। वाहन में ऑक्सीजन, नेबोलाइजर, बीपी मशीन सहित तमाम जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध हैं।
अमित धारियाल, जिला समन्वयक, आपात चिकित्सा सेवा 108, चंपावत।
जिले में है पांच 108 सेवा
चंपावत जिले में पांच आपात चिकित्सा सेवा 108 है। चंपावत, लोहाघाट, पाटी, श्रीरीठा साहिब और टनकपुर में ये सेवा है। इन पांच आपात सेवाओं के लिए कुल 12 ड्राइवर रखे गए हैं। जो बारी-बारी से ड्यूटी देते हैं।