टनकपुर/बनबसा (चंपावत)। छह माह से रीड्स संस्था के बनबसा स्थित उज्ज्वला पुनर्वास केंद्र में रह रही 12 वर्षीय किशोरी को आखिर उसके परिजन अपने साथ ले गए। बुधवार को सीओ आरएस रौतेला की मौजूदगी में किशोरी को उसके दादा और पिता के सुपुर्द किया गया। छह माह से उक्त किशोरी के रहने, खाने, चिकित्सा आदि का खर्च रीड्स संस्था कर रही थी।
23 जून को टनकपुर के सीओ रौतेला को पूर्णागिरि मार्ग पर एक किशोरी लावारिस हालत में भटकते हुए मिली थी। पूछने पर वह कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी। अनजान लोगों को देख डर भी रही थी। सीओ ने उसे टनकपुर कोतवाली के माध्यम से रीड्स संस्था के उज्ज्वला पुनर्वास केंद्र के सुपुर्द किया था। कुछ समय बाद संस्था कर्मियों के साथ घुल मिल जाने पर उसने अपने को टनकपुर के बोरागोठ की रहने वाली बताया। संस्था कर्मियों ने किशोरी के परिजनों का पता लगाया, लेकिन उन्होंने किशोरी को साथ ले जाने से मना कर दिया।
उसके पिता वाहन चालक हैं। वह मूलरूप से पिथौरागढ़ के नारायण नगर गरसौली के रहने वाले हैं, यहां बोरागोठ में किराए पर रहते हैं। आखिर संस्था कर्मियों और सीओ की बात मानकर किशोरी के परिजन उसे अपने साथ ले जाने का तैयार हो गए। बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में उक्त किशोरी को उसके दादा और पिता को सौंपा गया। संस्था के समन्वयक प्रकाश चंद्र और भावना चंद ने बताया कि उक्त किशोरी की मां अपने एक छोटे बच्चे को लेकर घर से कहीं चली गई थी। शरारतों पर किशोरी को डांट देने पर छह माह पहले वह अपने घर बोरागोठ से टनकपुर बाजार की ओर निकल पड़ी। रास्ता भटकने से वह पूर्णागिरि की ओर जाने लगी थी, जहां वह सीओ रौतेला को मिल गई थी।