चंपावत। आजादी की लड़ाई में 238 दिनों तक जेल काटने वाले स्वर्गीय जयदत्त चौड़ाकोटी के परिजनों के लिए इस बार का स्वतंत्रता दिवस खास होगा। उनकी पुत्रवधू जानकी के लंबे संघर्ष के बाद चौड़ाकोटी को सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मान लिया है। इसी साल 21 जून को जयदत्त को जिला प्रशासन ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा दे दिया है। मौत के 70 साल छह माह बाद जयदत्त को वह सम्मान मिल सका, जिसके वह आजादी के दिन से ही हकदार थे।
स्वतंत्रता सेनानी जयदत्त की पुत्रवधू जानकी को जिलाधिकारी की ओर से सेनानी उत्तराधिकारी परिचय पत्र जारी किया गया। एसडीएम अनिल गर्ब्याल ने बताया कि जारी परिचय पत्र को शासन के निर्देशानुसार सिर्फ कुटुंब पेंशन के लिए मान्य किया गया है। सूखीढांग-धूरा क्षेत्र की पहचान सात सेनानियों के नाम से है। इनमें से जनवरी 1913 में सेनानी जयदत्त को सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी माना ही नहीं। प्रशासन जयदत्त के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने का कोई साक्ष्य न होने की दलील देते हुए उनके दावे को नकारती रही। सेनानी के दर्जे के लिए सेनानी संगठन और उनकी पुत्रवधू जानकी देवी ने लंबे समय तक संघर्ष किया।
पिछले साल सेनानी उत्तराधिकारी संगठन ने आरटीआई से मिली जानकारी से साबित किया कि जयदत्त 28 सितंबर 1942 से 20 नवंबर 1942 तक अल्मोड़ा कारागार और 21 नवंबर 1942 से 24 मई 1943 तक बरेली जिला जेल में रहे। अंग्रेजों ने उनके खिलाफ डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स की धारा 38 (5) के तहत मुकदमा चलाया था। इस धारा का इस्तेमाल आमतौर पर अंग्रेजों के खिलाफ काम करने वालों पर किया जाता था।
सेनानी उत्तराधिकारी संगठन जिलाध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी ने बताया कि अन्य सेनानियों के साथ जयदत्त ने भी विभिन्न अभियानों में हिस्सा लिया था। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जेल गए। इसके चलते धूरा में नवंबर 2013 में तत्कालीन कमिश्नर एएस नयाल ने सेनानी स्मारक में जयदत्त सहित सभी सातों सेनानियों की प्रतिमा स्थापित की थी।