चंपावत। 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना के लिए फिलहाल 22 लाख रुपये भारी पड़ रहे हैं। इस धनराशि के नहीं मिलने से पेड़ों की गिनती बंद हो गई है। वन विभाग ने बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की गिनती करीब एक माह से बंद की हुई है। इसकी वजह विभाग को पेड़ गिनने के लिए अभी तक एक भी रुपया नहीं मिलना है। और इस काम में अब तक खर्च रकम वन विभागों के अधिकारियों की जेब से गई है।
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों में पिछले साल 26 दिसंबर से पेड़ों की गिनती शुरू हुई। छह टीमों ने पेड़ों को गिनने का काम किया। काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि रैघांव से शुरू कर तोलागांव, सुंगारखाल, कोठेरा, बेट्टा, नेत्र सलान, बरयूड़ी सहित डूब क्षेत्र में आने वाले कई वन क्षेत्रों में करीब 75 हजार पेड़ों को गिना गया। मजदूरों को दैनिक आधार पर मजदूरी देनी थी। अब तक बांध से संबंधित कंपनी ने एक भी रुपया नहीं दिया है। जबकि पेड़ों को गिनने के लिए 22 लाख रुपये का इस्टीमेट पिछले साल सितंबर में ही भेज दिया गया था। इस कारण मार्च के आखिरी सप्ताह से पेड़ों की गिनती बंद कर दी गई है।
कोट
पंचेश्वर बांध से संबंधित वापकोस कंपनी ने धन के भुगतान के लिए दो माह पूर्व बैंक खाता संख्या मांगी, मगर धन अब तक नहीं मिल सका है। इस कारण विभाग को गिनती रोकने को मजबूर होना पड़ा है।
कुबेर सिंह बिष्ट, डीएफओ, चंपावत।
कोट
पंचेश्वर डूब क्षेत्रों के पेड़ों की गिनती के लिए वन विभाग ने 22 लाख रुपये की मांग की थी। इस रकम के लिए वापकोस कंपनी को कई बार लिखा जा चुका है। मगर धन नहीं मिला। अब कंपनी को तुरंत धन देने को फिर से पत्र भेजा जाएगा।
डॉ.अहमद इकबाल, डीएम, चंपावत।