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नंधौर सेंचुरी के टाइगर रिजर्व बनने से संसाधन बढ़ेंगे

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नंधौर वन्यजीव अभयारण्य - फोटो : अमर उजाला
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टनकपुर (चंपावत)। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से नंधौर वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी की सूचना से वनकर्मियों का उत्साह बढ़ गया है। इसके साथ ही अभयारण्य में बाघ गणना की कवायद शुरू हो गई है। बुधवार को प्रशिक्षण समाप्ति के बाद गणना शुरू हो जाएगी।
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नंधौर के प्रस्तावित टाइगर रिजर्व में 270 वर्ग किमी में कोर जोन और 578 वर्ग किमी में बफर जोन होगा। इसके मद्देनजर बाघ गणना बेहतर ढंग से करने की तैयारी चल रही है। यह गणना टाइगर रिजर्व की घोषणा के लिए अहम साबित हो सकती है। इसीलिए नंधौर अभयारण्य में शामिल शारदा रेंज एवं डांडा रेंज के कर्मियों को भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून से आए विशेषज्ञों की टीम प्रशिक्षण दे रही है। एसडीओ राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार की बाघ गणना निर्धारित प्रपत्रों समेत स्मार्ट मोबाइल एप से भी होगी। इसके तहत ऑनलाइन रिपोर्टिंग होनी है। इसीलिए सभी फील्ड स्टाफ को गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि गणना के सटीक आंकड़े मिल सकें। बाघ गणना के साथ अन्य परभक्षी एवं बड़े शाकाहारी पशुओं के चिन्हाें का भी सर्वेक्षण होना है। इसके लिए हर बीट गणना इकाई मानी गई है। प्रत्येक बीट में बाघ संभावना क्षेत्र के दो किमी क्षेत्र में कैमरे लगाकर आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। डब्ल्यूआईआई के डॉ. एजाज ने सर्चपाथ, ट्रांजेक्ट लाइन में वनस्पति सर्वेक्षण, मानवीय व्यवधान, भूमि आच्छादन सर्वेक्षण की जानकारी देने के साथ ही मॉकड्रिल के माध्यम सेे प्रशिक्षण दिया। आंकड़ों का मिलान डब्ल्यूआईआई को उपलब्ध कराया जाएगा। गणना कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने इस बार बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बताया कि टाइगर रिजर्व के अनुरूप बेहतर संसाधन मिलने पर मानव वन्यजीव संघर्ष भी कम हो सकेगा।

नंधौर अभयारण्य में बाघों की गणना जल्द होगी
शारदा एवं डांडा रेंज में बाघ गणना के लिए प्रशिक्षण शुरू
डब्ल्यूआईआई की टीम ने डेरा जमाया, गणना के लिए कैमरे भी लगेंगे
स्मार्ट मोबाइल एप से गणना की रिपोर्ट भेजी जाएगी

नौ माह में बाघ चार महिलाओं को मार चुके
टनकपुर से सटे नंधौर अभयारण्य के जंगल में पिछले नौ माह ग्रामीणों के लिए भारी पड़े। इस अवधि में क्षेत्र के बाघ हमलावर रहे। नौ माह में चार महिलाओं की मौत से लोगों में दहशत रही। अब टाइगर रिजर्व बनने से इन बाघों पर अंकुश लगने की उम्मीद है। क्षेत्र के लोग निरंतर बाघों से सुरक्षा की मांग उठाते रहे हैं।
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