चंपावत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2022 तक सबको छत मुहैया कराने का सपना है। इस सपने साकार करने के लिए प्रधानमंत्री (शहरी) आवास योजना शुरू की गई। देश के अन्य शहरी क्षेत्रों की तरह चंपावत जिले के शहरी क्षेत्रों में भी योजना शुरू हुई, मगर इस योजना में शुरुआत में ही अड़चनें आने लगी हैं।
बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर आवेदन पत्रों को वापस भेजे जाने से योजना को शुरुआती झटका लगा है। नगर पालिका द्वारा भेजे गए आवेदन पत्रों में से करीब 80 प्रतिशत को बैंकों ने अस्वीकृत कर दिया। इनमें से ज्यादातर आवेदन गैर कृषि उपयोग वाली धारा 143 के तहत वापस किए गए हैं।
लोहाघाट व टनकपुर नगर क्षेत्रों की अधिकांश जमीन नजूल श्रेणी की है। इसके चलते जिले में एकमात्र चंपावत नगर पालिका क्षेत्र के ही आवेदनों को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया। शहरी मिशन योजना के सिटी मैनेजर महेश चौहान ने बताया कि ऋण आधारित पीएम आवास योजना के अंतर्गत आए सभी 77 आवेदनों को विभिन्न बैंकों को 9 अक्तूबर को भेजा गया।
इसमें 6 लाख रुपये से 12 लाख रुपये तक के कर्ज के लिए आवेदन किया गया था। इन आवेदनों में से महज 16 को स्वीकृत किया गया है। जबकि 61 आवेदन पत्रों को वापस कर दिया गया। और अब तक महज 3 को ही कर्ज दिया जा सका है।
सिटी मैनेजर का कहना है कि बैंकों ने अधिकांश आवेदन भूमि को गैर कृषि के उपयोग में बदलने का (धारा 143) प्रमाणपत्र नहीं दिए जाने के चलते वापस किए हैं। उनका कहना है कि पीएम आवास योजना के दिशा-निर्देशों में आधार कार्ड, राशनकार्ड, खसरा-खतूनी और मकान नहीं होने का शपथ पत्र ही देना है। गैर कृषि उपयोग के प्रमाणपत्र की शहरी क्षेत्र में जरूरत नहीं है।
डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने भी दो दिन पूर्व जिला स्तरीय पुनरीक्षण समिति की बैठक में इसे लेकर बैंकों को फटकार लगाई थी। साथ ही शहरी विनियमित क्षेत्र में धारा 143 के बगैर भी आवेदन पत्रों को स्वीकृत करने को कहा था। कहा कि सरकार की प्राथमिकता वाली इस योजना में आवेदक बैंकों को बेवजह परेशान न करें।
किसी भी आवास योजना के अंतर्गत कर्ज देते वक्त भूमि के कृषि उपयोग में नहीं आने का प्रमाणपत्र दिया जाना जरूरी है। इस शर्त से तभी रियायत दी जा सकती है, जब विनियमित प्राधिकरण इस संबंध में लिखित रूप से आदेश जारी करें। साथ ही भूमि संबंधी सभी दस्तावेजों से बैंकों का संतुष्ट होना भी जरूरी है।
आनंद सिंह रावत,
लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।