चंपावत।
एडीएम हेमंत कुमार वर्मा ने वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों को वन भूमि पर काबिज लोगों से संबंधित वनाधिकार के मुद्दों को सुलझाने का कार्य तेज गति से करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही डंपिंग जोन के लिए भूमि चयनित करने, वन भूमि, आरक्षित वन भूमि, नाप और बेनाप भूमि का खसरा-खतौनी चार सितंबर तक जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा।
बृहस्पतिवार को जिला कार्यालय सभागार में पंचेश्वर बांध परियोजना के तहत किए जा रहे वन भूमि, राजस्व भूमि, वनाधिकार, डंपिंग जोन आदि कार्यों की समीक्षा की गई। एडीएम ने एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षकों और उप निरीक्षकों से कहा कि वन भूमि पर काबिज लोगों की सूचना, डंपिंग जोन, बांध के सीमांकन क्षेत्र की वन भूमि, आरक्षित वन भूमि, खसरा, खतौनी, खेत नंबरों को प्रपत्रों सहित तीन-तीन प्रतियों में जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएं। उन्होंने वन भूमि पर काबिज लोगों, परिवारों की स्पष्ट स्थिति, परिवारों एवं व्यक्तियों की संख्या आदि भी उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने वन विभाग, राजस्व विभाग व वाप्कोस कंपनी के अभियंताओं को अवशेष कार्यों का फिर से संयुक्त निरीक्षण कर उसकी पूरी रिपोर्ट एसडीएम को उपलब्ध कराने को कहा। इस दौरान एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, अनिल गर्ब्याल, तहसीलदार नीलू चावला, ललित मोहन तिवारी, गोविंद राम सहित वाप्कोस के अभियंता उपस्थित थे।
मामले सुलझाने को गांवों में समितियां बनेंगी
एडीएम ने वाप्कोस कंपनी के अभियंताओं को सर्वेयर, ज्योलॉजिस्ट को भी वन और राजस्व कर्मियों के साथ अतिरिक्त संयुक्त सर्वे में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने एसडीएम, तहसीलदारों को वनाधिकार के मामलों को सुलझाने के लिए गांवों में समिति गठित करने तथा प्रत्येक गांव से तीन-तीन लोगों को समिति में नामित करने के निर्देश दिए।
डूब क्षेत्र के पेड़ाें की संख्या भी उपलब्ध कराएं
एडीएम ने वन भूमि, आरक्षित भूमि, वन पंचायत भूमि, नाप और बेनाम भूमि का कुल रकबा उपलब्ध कराने के साथ डूब क्षेत्र में आ रहे पेड़ों की संख्या, पेड़ की प्रजातियों की संख्या एवं नाम भी चार सितंबर तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी तरह कोई भी भूमि प्रपत्र में अंकित होने से न छूटे अन्यथा संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।