चंपावत। तल्लादेश क्षेत्र के बुजुर्ग राहुल सिंह को चंपावत के अस्पताल पहुंचने के लिए निजी वाहन में 700 रुपये खर्च करने पड़े। लधिया घाटी के भवान सिंह को चोट लगने पर अस्पताल तक आने में 1,100 रुपये खर्चने पड़े। समय भी दोगुना लगा।
जिले में आपात सेवा 108 की दस एंबुलेंस होने के बावजूद यह स्थिति है। इसकी वजह यहां की 70 प्रतिशत एंबुलेंस का ऑफ रूट होना है। इनके खराब होने या फिटनेस के लिए भेजने से परेशानी बढ़ी है। तल्लापाल, तल्लादेश, गुमदेश, लधिया, बाराकोट क्षेत्र में फिलहाल आपात सेवा 108 की एंबुलेंस सेवाएं काम नहीं कर रहीं हैं। इससे जिले का 80 प्रतिशत क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। जरूरत के वक्त अधिकतर रूटों पर एंबुलेंस मिलना मुश्किल हो रहा है।
आपात सेवा के लिए उपयोग में लाई जा रही 108 सेवा की एंबुलेंस के खराब होने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आपात सेवा में या तो इंतजार करना पड़ रहा है। जेब ढीली कर जीप या कार से बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। पाटी, पंचेश्वर, सूखीढांग, चंपावत की एंबुलेंस फिटनेस के लिए मंगलवार को गई है। मरम्मत के लिए बाराकोट की एंबुलेंस पिछले महीने और हाल में रीठा साहिब की एंबुलेंस बाहर गई है। फिटनेस के लिए गई मंच की एंबुलेंस के बृहस्पतिवार को आने की उम्मीद है।
सिर्फ तीन जगह तैनात हैं एंबुलेंस
चंपावत। जिले में अभी सिर्फ तीन जगह एंबुलेंस उपलब्ध है। जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर, जिला मुख्यालय चंपावत और पाटी की एंबुलेंस मरीजों के उपयोग में आ रही हैं। चंपावत की दो में से एक एंबुलेंस फिटनेस के लिए गई है जबकि दूसरी यहां सेवा दे रही है।
जिले की सात एंबुलेंस फिलहाल ऑफ रूट हैं। दो ठीक होने और पांच फिटनेस के लिए गईं हैं। इससे सेवा प्रभावित हुई है। बृहस्पतिवार को एक एंबुलेंस आने की उम्मीद है। तीन दिन के भीतर कुछ अन्य एंबुलेंस भी काम पूरा करा लौट आएंगी। - कमल शर्मा, जिला प्रभारी, 108 की एंबुलेंस सेवा, चंपावत।