अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। गोल्ड कोस्ट में इस माह हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने शानदार प्रदर्शन कर तीसरा स्थान हासिल किया। मगर जमीनी स्तर पर खेलों की हालत खस्ताहाल है। चंपावत जिले में खेल की बारीकियों को सिखाने के लिए खेल विभाग के प्रशिक्षक तक नहीं है। अलबत्ता ठेके के प्रशिक्षकों के जरिये काम चलाया जा रहा है।
नवोदित खेल प्रतिभाओं को हुनरमंद बनाने के लिए चंपावत जिला ठेके के प्रशिक्षकों के आसरे हैं। जिला क्रीड़ाधिकारी आरएस धामी का कहना है कि टनकपुर में मुक्केबाजी को छोड़ अन्य खेलों के प्रशिक्षक ठेके के हैं। टनकपुर के उप जिला क्रीड़ाधिकारी व मुक्केबाजी के प्रशिक्षक जेएस मेहता टनकपुर स्टेडियम में मुक्केबाजी का प्रशिक्षण देते हैं।
जबकि पिछले सप्ताह विभिन्न खेलों के 21 प्रशिक्षकों को चयनित किया गया है। बेहद कम मानदेय में रखे गए ये प्रशिक्षक 2018-19 वित्त वर्ष में सिर्फ दस माह तक प्रतिभाओं को निखारेंगे। जिला खेल अधिकारी ने उत्तराखंड के खेल निदेशक को ठेके के इन 21 प्रशिक्षकों का अनुमोदन करने के लिए पत्र भेजा है। ताकि ये प्रशिक्षक 31 खेलों को जिले के 6 प्रशिक्षण केंद्रों (टनकपुर स्टेडियम, चंपावत के गोरलचौड़ मैदान, ऊचौलीगोठ, गैडाखाली, बनबसा के मिनी स्टेडियम और लोहाघाट जीआईसी के मैदान) में संचालित करा सकें।
टनकपुर में शुरू हो गया प्रशिक्षण
जिले के इकलौते स्टेडियम टनकपुर में मंगलवार से प्रशिक्षण शुरू हो गया है। यहां हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, मुक्केबाजी, वॉलीबाल, ताइक्वांडो, एथलेटिक्स और बास्केटबाल का प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षक प्रकाश सिंह, गौरव खोलिया, दीपक सेठी, रेखा पांडेय, आशा पांडेय, दिलदार अली, मोहसिन और सुभाष पांडेय इन खेलों का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
खेल बजट में कटौती से होगी दिक्कतें
मौजूदा वित्त वर्ष के लिए जिला योजना में कटौती का असर खेल विभाग पर भी पड़ेगा। जिला योजना की पिछले साल की 40.97 करोड़ रुपये की योजना के सापेक्ष 2018-19 की योजना महज 32.10 करोड़ रुपये हैं। पिछले साल खेल विभाग के लिए 70 लाख रुपये का परिव्यय अनुमोदित था, लेकिन मिले महज 49.20 लाख रुपये। वहीं इस वित्त वर्ष खेल विभाग के लिए 54.60 लाख रुपये अनुमोदित हैं। कम अनुमोदित रकम का असर खेल गतिविधियों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
राज्य बनने के बाद नहीं बना कोई स्टेडियम
उत्तराखंड बने 17 वर्ष से अधिक हो गए हैं, लेकिन एक भी नया स्टेडियम नहीं बन सका है। चंपावत जिले का एकमात्र स्टेडियम टनकपुर में है। जबकि लोहाघाट में छमनियाचौड़ में स्टेडियम का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं तीन मुख्यमंत्रियों के ऐलान के बावजूद चंपावत में स्टेडियम नहीं बन सका है। यहां तक कि इसके लिए जमीन की तलाश तक भी पूरी नहीं हो सकी है।