चंपावत। जिले के पहाड़ी हिस्से का आधार केंद्र बनाने वाला कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तीन दिन बाद फिर से चालू तो हुआ, लेकिन इससे भी लोगों की परेशानी कम नहीं हुई। सर्वर में गड़बड़ी की वजह से सोमवार को किसी का भी आधार कार्ड नहीं बन सका। इसके चलते दूरदराज से आए लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। आधार कार्ड बनाने आए कुछ लोगों ने बृहस्पतिवार को केंद्र के कर्मी के साथ अभद्रता की थी। तब से यहां आधार कार्ड बनना बंद हो गया था। पुलिस सुरक्षा मिलने के बाद जिला पंचायत कार्यालय में बने केंद्र को सोमवार से दोबारा शुरू जरूर किया गया, लेकिन फिर भी लोगों के आधार कार्ड नहीं बन सके।
सरकार ने आधार को अधिकतर सरकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य कर दिया है। इसके चलते आधार बनाने को लेकर लोगों की मारामारी हो रही है। जिले में बनबसा, चंपावत में ही आधार कार्ड बनाने की सुविधा है। चंपावत जिले में ढाई लाख से अधिक लोगों के आधार कार्ड बन चुके हैं, लेकिन सात हजार से अधिक लोगों के कार्ड या तो बनने हैं या फिर कार्डों में सुधार करने हैं। सीएससी के जिला समन्वयक कुलदीप भंडारी का कहना है कि बृहस्पतिवार को कुछ लोगों ने आधार बनाने वाले कर्मी के साथ अभद्रता कर दी थी। इसके बाद आधार बनाने वाला कर्मी चंपावत से बाहर चला गया था। डीएम को मामले से अवगत कराया गया। सोमवार को आधार कार्ड बनाने वाले नए कर्मी को सिस्टम से ऑन बोर्ड कर केंद्र खुला, लेकिन सर्वर में दिक्कत होने से आधार कार्ड नहीं बन सके।
सर्वर में गड़बड़ी, आधार कार्ड नहीं बने
आधार कार्ड बनाने आए तमाम लोग बैरंग लौटे
आधार न बनने से शांति की पेंशन लटकी
करीब 42 किमी दूर गुमदेश के टुमकांडा गांव से दूसरी बार आधार कार्ड बनाने जिला मुख्यालय पहुंची शांति देवी (68) बताती हैं कि आधार कार्ड न बनने से उनकी वृद्धावस्था पेंशन फरवरी से नहीं मिल सकी है। इससे पूर्व भी वह कार्ड बनाने आ चुकी हैं। फिर भी उनका आधार कार्ड नहीं बन सका।
मायूस रहे दूसरी बार आए संजय
रेगड़ू के संजय कुमार अपनी बेटी मेघा का आधार कार्ड बनाने आए थे। उनका कहना है कि पिछले सप्ताह भी वह आधार कार्ड बनाने आए थे। तब भारी भीड़ के चलते आधार कार्ड नहीं बन सका था। वह 36 किमी दूर से चंपावत पहुंचे, लेकिन सर्वर में दिक्कत होने से उनका आधार कार्ड नहीं बन सका।
जानकी खर्कवाल का आधार बृहस्पतिवार को नहीं बन सका था। सोमवार को भी छठी में पढ़ने वाले बेटे अभिनव कुमार का आधार कार्ड बनाने आई, लेकिन सर्वर डाउन होने से उन्हें भी खाली हाथ लौटना पड़ा।
सात किमी पैदल चल आई रोहिता भी बैरंग लौटी
35 किमी दूरस्थ क्षेत्र कफल्टा की रोहिता देवी अपने तीन बच्चों के साथ आधार कार्ड बनाने चंपावत केंद्र पहुंची। करीब सात किमी की पैदल दूरी तय कर चंपावत पहुंची रोहिता को मायूसी हाथ लगी। रोहिता को अपनी बेटी बबीता का आधार कार्ड बनाना था।