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टैंकरों से रोजाना बंट रहा 54 हजार लीटर पानी

Sun, 07 May 2017 10:56 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
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गोरलचौड़ में टैंक से पानी भरते लोग - फोटो : अमर उजाला
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जल स्रोतों में 60 प्रतिशत की कमी आने से पेयजल को लेकर संकट गहरा गया है। कई मुहल्लों में पानी की निर्भरता टैंकरों पर हो गई है। जिला मुख्यालय में ही टैंकर और पिकअप वाहनों से रोज 54 हजार लीटर पानी बांटा जा रहा है। धौन के जल स्रोत में भी दबाव बढ़ गया है। यहां से सेना, एसएसबी और डेयरी के टैंकर भी पानी भर रहे हैं। इसके चलते पेयजल वितरण में देरी भी हो रही है।

चंपावत में इस वक्त 11 लाख लीटर पानी के सापेक्ष बमुश्किल से 2.35 लाख (करीब 21 प्रतिशत) लीटर पानी मिल रहा है। ज्यादातर मुहल्लों में एक दिन छोड़ पानी की आपूर्ति हो रही है।  नलों से आपूर्ति कम होने पर अब निर्भरता मुख्य रूप से टैंकर और पिकअप वाहनों से बंट रहे पानी पर हो गई है। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा ने बताया कि कई पेयजल योजनाओं के स्रोत में डिस्चार्ज कम हो गया है। रौखेत, छीड़ापानी समेत कई योजनाआें के स्रोत में करीब 70 फीसदी की कमी आ गई है।
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तल्लीहाट, मल्लीहाट, मोटरस्टेशन, जीआईसी रोड, कनलगांव, गोरलचौड़ रोड और मादली आदि क्षेत्रों में पेयजल की ज्यादा दिक्कत है। वर्तमान में चंपावत के संवेदनशील मुहल्लों में दो विभागीय टैंकरों और चार पिकअप के जरिये रोज कुल 54 हजार लीटर पानी बांटा जा रहा है। धौन स्रोत में भी दबाव बढ़ा है। सेना, एसएसबी और डेयरी के टैंकर सहित कई अन्य लोग भी यहीं से पानी भर रहे हैं। जिस वजह से पानी बांटने में देरी हो रही है।

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25 दिनों से पानी ढोकर प्यास बुझा रहे मंच के लोग
लाइन से पेयजल वितरण में हो रही खामी का नतीजा भुगत रहे ग्रामीण
चंपावत। तल्लादेश के मंच कस्बे में लोग पेयजल को तरस गए हैं। यहां बीते 25 दिनों से पाइप लाइन में पानी की बूंद नहीं टपकी है। दूरदराज के नौलों से पानी ढोकर ग्रामीण प्यास बुझाने को मजबूर हैं। यहां राजकीय इंटर कॉलेज, बैंक और थाने के कर्मी भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने पेयजल आपूर्ति जल्द सुचारु नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर मंच कस्बा तल्लादेश का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां जीआईसी, भारतीय स्टेट बैंक की शाखा, थाना, वन विभाग का विश्राम गृह सहित कई कार्यालय हैं। बीते 13 अप्रैल से यहां के लोग पेयजल की किल्लत से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों के अलावा नौकरी-पेशा लोगों को भी इसकी मार झेलनी पड़ रही है। ग्रामीण छह सौ से सवा किमी दूर नौलों से पानी ढोने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल संस्थान को कई बार पानी की किल्लत की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन उसकी ओर से की जा रही अनदेखी से लोगों की परेशानी दूर नहीं हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता शेर सिंह महर, बिशन सिंह, राहुल, वजीर सिंह, श्याम सिंह आदि लोगों ने विभाग से जल संकट की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। आपूर्ति सुचारु न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। 
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पुलहिंडोला में पानी को मारामारी
चंपावत। लोहाघाट विकासखंड के पुलहिंडोला कस्बे में लगे छह में से तीन मांडेक्स हैंडपंपों के काम नहीं कर रहे हैं। इससे यहां पानी का संकट विकराल रूप ले चुका है। इस कस्बे में हैंडपंपों के अलावा अन्य कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। जल संस्थान का कहना है कि अब यहां वाहनों के जरिये पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। नकुल पंत समेत कई ग्रामीणों ने हैंडपंप की तत्काल मरम्मत करने, यहां बनाए जा रहे ट्यूबवेल के काम में तेजी लाने की मांग की है।

 
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