चंपावत। लोकसभा चुनाव में पहली बार शहरी मतदाताओं ने अपना दम दिखाया। उत्तराखंड बनने के बाद हुए चौथे लोकसभा चुनाव में जिले के शहरी क्षेत्रों के वोटरों ने ग्रामीण मतदाताओं से ज्यादा वोटिंग की। चंपावत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 52.24 प्रतिशत वोट पड़े जबकि शहरी क्षेत्र के 70.31 फीसदी लोगों ने मत डाला।
11 अप्रैल को हुए लोकसभा चुनाव के लिए चंपावत जिले में 193863 वोटरों में से 109901 (56.69 प्रतिशत) ने मतदान किया। चंपावत विधानसभा सीट में 91637 मतदाताओं में से 55969 (61.07 प्रतिशत) ने और लोहाघाट सीट में 102226 में से 52932 (51.77 प्रतिशत) लोगों ने वोट डाले। जिले के शहरी क्षेत्र के 29459 मतदाताओं में से 20714 (70.31 प्रतिशत) ने वोट डाले। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 164404 मतदाताओं मे ंसे 89187 (52.24 प्रतिशत) लोगों ने वोट डाले।
उत्तराखंड बनने के बाद से 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में शहरी क्षेत्र के लोग मतदान के लिए कम निकलते रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भी शहर के 22895 वोटरों में से मात्र 11486 (50.16 प्रतिशत) ने मतदान किया था। तब गांवों में 156393 में से 87424 (55.90 प्रतिशत) लोगों ने वोट डाला।
अधिक मतदान से हल होंगी शहरी समस्याएं
शहरी मतदाताओं का कहना है कि अपनी समस्याओं के समाधान को दबाव बनाने के अलावा सियासत को बेहतर बनाने के लिए इस बार अधिक मतदान किया गया। पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी, मनोज पांडेय आदि का कहना है कि शहरी क्षेत्रों के आधारभूत ढांचे में सुधार, पार्किंग, यातायात, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों को लेकर लोग बढ़-चढ़कर मतदान को आगे आए। इसके अलावा मतदाता जागरूकता अभियान का भी शहरी क्षेत्र में असर रहा।