लोहाघाट (चंपावत)। जिले में 95 नहरों में से 38 नहरों का लाभ नहीं मिल पाने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बारिश न होने पर किसानों के लिए नहरें ही सिंचाई का जरिया थीं। 18 नहरों के क्षतिग्रस्त होने और 20 नहरों के पूरी तरह बंद होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे फसल प्रभावित हो रही है।
रबी की फसल की बुवाई के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं होने से किसान सिंचाई के लिए परेशान हो रहे हैं। 26 सितंबर से अब तक महज 39 एमएम बारिश हुई। वहीं बड़ी संख्या में क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत नहीं होने से उनकी दिक्कतें और भी बढ़ गई हैं। जिले में 281 किलोमीटर लंबी 95 नहरों का निर्माण किया गया है। इन नहरों से 1115 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी लेकिन इस वक्त 57 चालू नहरों से 723 हेक्टेयर सिंचाई ही हो पा रही है। स्रोत में पानी की कमी, आपदा में नुकसान होने के चलते 18 नहरें क्षतिग्रस्त हैं और 20 नहरें पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं। इस तरह करीब 40 प्रतिशत नहरें बंद हैं। 95 नहरों में से 38 नहरों से खेतों को पानी नहीं मिल पा रहा है। बंद नहरों को शुरू करना भी चुनौती बना हुआ है। किसानों का कहना है कि सिंचाई की कमी से पैदावार पर मार पड़ रही है। करीब 27 हजार हेक्टेयर खेती योग्य जमीन में बमुश्किल 15 प्रतिशत में ही सिंचाई की सुविधा है।
क्षतिग्रस्त 18 सिंचाई नहरें
सेरा, सन्यूड़ा, डांडा, फुंगर, बयाला, वैला दाई, वैला बाई, वैला पिनाना, बौतड़ी, छुलापै, बाराकोट, तल्ला गांव, बूम, तल्ली लड़ी, साल, गुरैली, पासम और बिंडा तिवारी।
परित्याग 20 नहरें
तरकुली, चंचलपुर, गरसाड़ी, ओलखढुंगा, ढकना, द्यिूरी, साल-टांण, कलजाख, दुधौरी, बेलखेत द्वितीय, कठौल चल्थी, पड़ासो, करौली, चौड़ागूंठ, रमैला, निडिल, खूना, पसौली, बिशुंग और मंगोली।
बंद पड़ी नहरों को चालू करने के लिए 101.60 लाख रुपये की मांग की गई थी। इसके सापेक्ष 84.48 लाख रुपये इस माह मिले हैं। इस रकम से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत के अलावा बाढ़ सुरक्षा के कार्य कराए जाएंगे।
सुरेश चंद्र रावत, अधिशासी अभियंता।
सिंचाई विभाग, लोहाघाट खंड।