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राम के वन गमन का प्रसंग सुनाया

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चंपावत। जिला मुख्यालय के छतार में स्थित राम धाम में रामकथा जारी है। कथा सुनने को भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। कथा के चौथे दिन व्यास सीतारमण दास ने राम के वन गमन का वर्णन किया।

कथा वाचक सीतारमण दास ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को प्रजा बेहद पसंद करती थी। अयोध्या के लोग चाहते थे कि प्रभु श्रीराम अयोध्या के राजा बनें। राज्याभिषेक के लिए अयोध्या को बेहद सुंदर तरीके से सजाया हुआ था। लेकिन कैकयी की दासी मंथरा श्रीराम से द्वेष रखती थी। राम के बजाय भरत को राज्य दिलाने को लेकर मंथरा कैकयी को उकसाने लगी। वह भरत को राज्य और भगवान श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास हो इस कामना के साथ कैकयी के कान भरने में सफल रही। तब कैकयी ने राजा दशरथ को दो वचनों को पूरा करने के लिए मजबूर कर दिया।
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माता पिता की आज्ञा का पालन करते हुए श्रीराम भाई लक्ष्मण और जानकी के साथ वन को चल दिए। कथा वाचन में संत रामगोपाल दास, महंत रामगिरी, रमेश दास, हरिशरण दास, सियाराम दास, हरि दास, पवन दास समेत कई मठों के संत मौजूद थे।
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364 रोगियों का निशुल्क उपचार किया
चंपावत। राम धाम में चल रही राम कथा में निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। उद्घाटन पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी ने किया। रविवार को लगे चिकित्सा शिविर में 364 रोगियों का निशुल्क उपचार किया गया। जिनमें 82 हृदय रोगी, 107 सामान्य रोगी, 50 आंखों के रोगी, 50 स्त्री रोग और 75 पैथोलोजी की जांच कर दवा दी गई। शिविर में डॉ. योगेश शर्मा, डॉ. प्रमोद जोशी, डॉ. पीसी फुलेरिया, डॉ. हरीश सती, डॉ. कुंती हर्बोला, डॉ. जीबी बिष्ट और डॉ. आरके जोशी ने मरीजों की नब्ज टटोली।
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