टनकपुर (चंपावत)।
लगातार हो रही बारिश से मां पूर्णागिरि धाम में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। कई जगह पहाड़ियों के दरकने से धाम का पैदल मार्ग बंद है। बिजली का ट्रांसफार्मर फुंकने से चंद्रिका खटक गांव के लोग नौ दिन से अंधेरे में रात गुजार रहे हैं। बताने के बावजूद ऊर्जा निगम ने सुध नहीं ली। मंदिर के पुजारी, दुकानदार, ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द व्यवस्थाएं सुचारु करने की मांग की है।
मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में हनुमानचट्टी, लादीगाड़ में दरकी पहाड़ी का मलबा तो लोनिवि ने हटाकर कर गाड़ियों की आवाजाही के लायक बना दिया है, लेकिन इन स्थानों में बारिश से हो रहे कीचड़ के कारण दोपहिया वाहनों से आवाजाही में दुर्घटना का खतरा है। सिद्धमोड़ के पास दो स्थानों में पहाड़ी का मलबा गिरने से पैदल रास्ता शनिवार की शाम से बंद है। धाम के लौटते समय मार्ग की सीढ़ियों में भी मलबा अटकने से लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोनिवि के एई एपीएस बिष्ट का कहना है कि मलबा हटाने के लिए मजदूर लगाए गए हैं, लेकिन मौसम न खुलने के कारण मलबा हटाने के काम में दिक्कतें आ रही है।
उन्होंने कहा कि मौसम खुलते ही मलबा हटा दिया जाएगा। इधर पूर्णागिरि धाम से आधा किमी दूर स्थित चंद्रिका खटक गांव में विद्युत ट्रांसफार्मर दो जुलाई से फुंका है। इस गांव में रह रहे 22 परिवार नौ दिनों से अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर हैं। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष किशन तिवारी, दुर्गा दत्त तिवारी, टीकाराम तिवारी, ललित तिवारी, ईश्वर तिवारी आदि ने ऊर्जा निगम से खराब ट्रांसफार्मर बदलने या फिर भैरव मंदिर से गांव का विद्युत कनेक्शन जोड़ने की मांग की है।
संवेदनशील स्थानों की पांच दुकानें बंद कराई
टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम में आपदा के लिहाज से संवेदनशील स्थानों की आठ दुकानों में से पांच को प्रशासन के निर्देश पर मंदिर समिति ने बंद करा दिया है। समिति के अध्यक्ष भुवन चंद्र पांडेय ने बताया कि धाम क्षेत्र के संवेदनशील स्थानों पर समिति के लोग बराबर नजर रखते हुए प्रशासन के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि संवेदनशील स्थानों की तीन और दुकानों को हटाने के लिए कहा गया है।
एक घंटा बाधित रहा पूर्णागिरि मार्ग
टनकपुर (चंपावत)। बारिश के कारण उफान पर आए किरोड़ा नाले ने सोमवार की सुबह पूर्णागिरि धाम के मार्ग एक घंटे तक अवरुद्ध किए रखा, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंगाजल लेकर मां पूर्णागिरि धाम को पैदल जा रहे कांवड़ियों को भी मार्ग खुलने के लिए एक घंटे का इंतजार करना पड़ा। टनकपुर से सूखीढांग क्षेत्र के पहाड़ी इलाके में बारिश होते ही किरोड़ा नाला उफान पर आ जाता है। इससे न केवल पूर्णागिरि जाने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है, बल्कि कई गांवों का सड़क संपर्क भी घंटों तक कटा रहता है। सोमवार को भी नाला सुबह सात बजे से आठ बजे तक उफान पर रहा।