लोहाघाट की लोहावती नदी में पाइप डालकर पंप तक पानी पहुंचाते जल संस्थानकर्मी।
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नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के लिए हाहाकार मचना शुरू हो गया है। पेयजल स्रोत, नदी-नालों के जल स्तर में 50 फीसदी से ज्यादा गिरावट आने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोहाघाट शहर में रोज 16.20 लाख लीटर पानी की जरूरत है। इसके सापेक्ष पेयजल योजनाओं के जरिये 3.45 लाख लीटर ही पानी पहुंच पा रहा है। ऐसे में जल संस्थान को व्यवस्था बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से अच्छी वर्षा नहीं होने के कारण जल स्रोतों में भारी कमी आ गई है। लोहावती नदी भी नाले के रूप में परिवर्तित हो गई है। नदी में पानी कम होने से जल संस्थान को पानी लिफ्ट करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विभाग वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लोहावती नदी को जगह-जगह बांधकर मोटे पाइपों के जरिए पानी को जल संस्थान के टैंक में डाल रहा है। जल संस्थान के अभियंता पवन बिष्ट का कहना है कि पेयजल स्रोतों में 50 फीसदी से अधिक की गिरावट आ गई है। उनका कहना है कि लोगों को पेयजल समस्या से निजात दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सेरीगैर में चौथे दिन मिल रहा पानी
लोहाघाट विकासखंड में 64 ग्रामीण पेयजल योजनाएं हैं। सभी पेयजल योजनाओं के जल स्तर में 50 फीसदी से अधिक की कमी आई है। सर्वाधिक संकटग्रस्त सेरीगैर क्षेत्र में चौथे या पांचवे दिन लोगों को पानी मिल पा रहा है। यहां के लिए बनी पेयजल योजना में 103 संयोजन हैं। यहां के लिए प्रतिदिन 30 केएल पानी की आवश्यकता है। जबकि बमुश्किल से 10 से 12 केएल ही पानी मिल पा रहा है। लोग नौलों, धारों, हैंडपंपों से पानी ढोकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।