फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार साल में 115 खाद्य पदार्थो के नमूनों की हुई जांच

विज्ञापन
विज्ञापन
चंपावत। दिवाली पर्व को देखते हुए खाद्य विभाग ने जिले में चेकिंग अभियान तेज कर दिया है। खाद्य विभाग की ओर से बीते चार सालों में खाद्य पदार्थों के 115 नमूनों की जांच में केवल आठ नमूने फेल पाए गए। विभाग की ओर से चार साल में डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
विज्ञापन


प्रयोगशाला में जांच के दौरान अचार, रिफाइंड तेल, खोया, जीरा पाउडर, खुले दूध के नमूने गलत पाए गए जिनसे जुर्माना वसूल किया गया। खाद्य विभाग ने वर्ष 2018 में दुकानों में रखी एक्सपायरी डेट की खाद्य सामग्री को नष्ट कर अबतक 60 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया है जबकि 11 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इनमें से दो नमूनों में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। खाद्य अधिकारी योगिता तिवारी ने बताया कि चार साल में 115 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे जिनमें से आठ नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।


वर्ष नमूने फेल जुर्माना
2015 24 2 25 हजार
2016 37 2 55 हजार
2017 43 2 10 हजार
2018 11 2 60 हजार


चंपावत का चार्ज पिथौरागढ़ के अधिकारी के जिम्मे
चंपावत। दीपावली का पर्व करीब है। ऐसे में बाजार में तमाम तरीके की मिठाइयां बिक रही है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए मिलावटखोरी भी की जाती है लेकिन इससे निपटने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के पास जरूरी संसाधन तक नहीं है। पूरा विभाग महज एक अधिकारी के हवाले है। फील्ड अधिकारी के साथ ही कार्यालय में एक कर्मी तक नहीं है। काम चलाने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के एक बाबू से कभी-कभार मदद ली जाती है।
विज्ञापन

दुग्ध संघ अधिकारी एमएम पंत का कहना है कि दिवाली के मौके पर दूध और इससे बने उत्पादों की खपत में 60 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा होता है। दूध, मावा, मिठाई, पनीर समेत तमाम खाने-पीने की वस्तुओं की मांग तो बढ़ती है पर आपूर्ति में अंतर नहीं आता। ऐसे में बढ़ी खपत की भरपाई के लिए मिलावट या गुणवत्ता में गड़बड़ी का खतरा बढ़ जाता है। सैंपल लेने वाले खाद्य सुरक्षा विभाग की हालत खराब है। करीब तीन साल से जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी की कुर्सी खाली है। यहां की अतिरिक्त जिम्मेदारी पिथौरागढ़ के अधिकारी के पास है।
जिले में सिर्फ मिठाई की ही 150 से ज्यादा दुकानें हैं लेकिन इन सामग्रियों के परीक्षण का कायदे का तंत्र नहीं है। पांच तहसीलों में से मात्र एक में अभिहीत अधिकारी (खाद्य निरीक्षक) की कुर्सी है। टनकपुर-बनबसा मैदानी क्षेत्र जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर होने के अलावा संवेदनशील भी है। वहीं पाटी, बाराकोट और लोहाघाट में भी कोई निरीक्षक नहीं है। छापामारी के लिए वाहन तक नहीं है। अन्य संसाधन भी आधे-अधूरे हैं। इन हालातों में सैंपलिंग करने को खुद विभाग भी चुनौती मान रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगिता तिवारी का कहना है कि मिलावट से निपटने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। मंगलवार को विभाग ने डेयरी के दूध का सैंपल लिया।
विज्ञापन



नकली दूध, पनीर, मावा, मिठाई सहित तमाम अन्य खाद्य सामग्री सेहत के लिए नुकसानदायक है। मिलावटी सामग्री गुर्दे, लीवर और आंत पर सबसे ज्यादा असर डालती है।
- डॉ. आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें