लोहाघाट (चंपावत)। पाटी विकासखंड के गड्यूड़ा नवीन प्राथमिक स्कूल के शिक्षक शंकर सिंह अधिकारी के शिक्षण के प्रति समर्पण का ये नतीजा है कि में शहर में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने गए कई छात्रों ने वापस सरकारी विद्यालय में दाखिला लिया। 2012 में 22 छात्रों वाले इस स्कूल में छात्र संख्या बढ़कर 62 तक पहुंच गई है।
जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) सत्यनारायण ने बताया कि प्रभारी प्रधानाध्यापक अधिकारी ने दो सामुदायिक शिक्षकों की तैनाती की और अपने वेतन का दस फीसदी हिस्सा वे छात्रों पर खर्च करते हैं। इससे शिक्षण सामग्री वितरित करने के साथ हर कक्षा, रसोई, शौचालय में स्वच्छता बनाए रखने के लिए कूड़ेदान लगाए गए हैं। सप्ताह में तीन दिन सायंकालीन कक्षाओं का भी संचालन किया जाता है। गर्मियों की छुट्टी में छात्रों के शैक्षिक और शिक्षणेत्तर स्तर में सुधार के लिए स्कूल का संचालन करते हैं। मिड डे मील में बनने वाली सब्जी के लिए स्कूल परिसर में ही सब्जी उगाने का प्रयोग भी शुरू किया गया है। छात्र हित में किए जा रहे कार्यों से प्रभावित होकर ग्रामीणों ने चार नाली भूमि विद्यालय विकास के लिए दान में दी है।
84 की उम्र में भी भविष्य संवार रहे आईआईटी के प्रोफेसर बिष्ट
चंपावत। सेहत ठीक न होने के बावजूद भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी) के रिटायर्ड प्रोफेसर हरिदत्त बिष्ट (84) नई पीढ़ी की जिंदगी को संवारने के काम में जुटे हैं। वे हिमवत्स संस्था के माध्यम से गरीब बच्चों की राह को आसान कर रहे हैं। इस संस्था में मुख्य रूप से ऊंचाई छू चुके उनके शिष्य दान देते हैं। उनके पढ़ाए ढेरों छात्र यूएसए, कनाडा, ब्रिटेन समेत कई देशों में ऊंचे ओहदे में है।
2004 में दो लाख रुपये से शुरू हुई इस मेधावी छात्रवृत्ति से अब तक 55 छात्रवृत्तियां दे चुके हैं। फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंसी के माध्यम से प्रो.बिष्ट बीटेक में चयनित निर्धन छात्र को 20 हजार और एमबीबीएस में चयनित छात्र को 25 हजार रुपये प्रति वर्ष वजीफा देते हैं। इस वक्त उत्तराखंड में 40 से अधिक छात्र इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसके अलावा आठ प्राइमरी एवं जूनियर हाईस्कूलों को गोद लेकर यहां के नौनिहालों को डिजिटल ई-लर्निंग शिक्षा देने की शुरुआत की।
संघर्ष के सहारे प्रो.बिष्ट ने आईआईटी से लेकर यूएसए तक का सफर पूरा किया। इन्हीं कठिन हालातों ने उन्हें दूसरों की मदद की सीख दी। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ 2010 में डड़ा निवासी प्रो.बिष्ट को विज्ञान वारिधि सम्मान से और 2017 में चंपावत रत्न पुरस्कार से नवाज चुकी है।