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मलबे से वन संपदा को पहुंच रहा नुकसान

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चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ के बीच चल रहे बारहमासी सड़क निर्माण के दौरान खाई में मलबा डाले जाने से बस्टिया गूंठ और मझेड़ा ग्राम पंचायत की वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वांला से बनलेख के बीच रोड कटिंग की मिट्टी डंपिंग जोन में न डालते हुए सीधे खाई में डाला जा रहा है। ग्रामीणों ने डीएम समेत कई अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर वन संपदा को हो रहे नुकसान पर रोक लगाने की मांग उठाई है।

ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले बरसात में ग्राम मझेड़ा को सड़क के किनारे फेंका गया मलबा भूस्खलन का कारण बन सकता है। इसके अलावा बस्टिया गूंठ को मझेड़ा से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग भी मलबे से दब चुका है। मनरेगा के तहत बमकुड़ियाधार से चवोआ तोक तक जाने वाला सीसी मार्ग, विधायक निधि से बनाया गया मझेड़ा-बस्टियागूंठ खडंजा, राज्य वित्त मद से निर्मित कैलाश होटल से बरमखोला मार्ग भी मलबे के कारण बंद हो गए हैं।
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इसके अलावा जिला योजना में निर्मित सीम पेयजल योजना और हरियाली योजना के तहत निर्मित दो पेयजल टैंक रोड कटिंग के मलबे से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान नारायण दत्त, सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गादत्त भट्ट, ईश्वरी दत्त भट्ट, नारायण भट्ट, घनश्याम, भैरव दत्त, प्रकाश चंद्र, सुरेश चंद्र, बची राम, गणेश दत्त, बंशीधर सहित तमाम ग्रामीण शामिल हैं।
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छोटे छोटे स्कूली बच्चों को हो रही हैं परेशानियां
चंपावत। बारहमासी सड़क निर्माण के दौरान निकले मलबे ने छोटे छोटे स्कूली बच्चों की राह भी रोक ली है। बस्टियागूंठ से अध्ययन के लिए जीआईसी धौन आने वाले 54 बच्चों को रास्ते में मलबे के कारण स्कूल पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में अभिभावकों की ओर से कई बाद कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गादत्त भट्ट का कहना है कि इससे पूर्व अभिभावकों ने स्वयं के खर्चे से मजदूर लगाकर स्कूली रास्ते से मलबा हटाया था। अब फिर पहले जैसी स्थिति हो गई है।
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