दो रात के ब्लैक आउट के बाद बुधवार सुबह चंपावत जिले के पहाड़ी हिस्से में बिजली आई। करीब 24 घंटे तक मरम्मत के काम के बाद बिजली आपूर्ति सुचारु हुई। सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों को जनरेटर से काम चलाने में पौने दो लाख रुपये खर्च करने पड़े। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की पांच रामलीलाओं को केरोसीन के सहारे लीला का मंचन करना पड़ा।
चंपावत, लोहाघाट, पाटी और बाराकोट ब्लॉक की दो लाख से अधिक की आबादी को सोमवार और मंगलवार की पूरी बगैर बिजली के काटनी पड़ी। सोमवार शाम करीब पांच बजे बाद से गुल बिजली बुधवार 6.30 बजे बाद बहाल हो सकी। इन तकरीबन 37 घंटों में कारोबार पर भी बत्ती गुल होने की मार पड़ी। करवा चौथ व्रत की तैयारी कर रही महिलाओं पर भी इसका असर पड़ा। लोगों को टेलीविजन से तो दूर रहना ही पड़ा, मोबाइल चार्जिंग तक के लिए तरसना पड़ा।
बिजली विभाग के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर घाट के पास बागधारा के नजदीक गधेरे में पिथौरागढ़ से आ रही हाइटेंशन लाइन में चीड़ का विशालकाय पेड़ गिर गया था। जिससे दो टावर और एक डबल पोल उखड़ गया। सोमवार की रात से ही फॉल्ट खोजने का काम शुरू हुआ। मंगलवार की सुबह से ईई राजेश कुमार के नेतृत्व में चंपावत के एसडीओ बीएम भट्ट, लोहाघाट के एचएस सौन, जेई रमेश चंद्र पंत, बीबी गहतोड़ी, अशोक कुंवर के साथ दो दर्जन से अधिक बिजली कर्मी और फायर बिग्रेड के कर्मचारियों ने लाइन की मरम्मत काम किया। ईई ने बताया कि पोलों और लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से ढाई लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
चार साल से ठीक नहीं हो सकी वैकल्पिक लमगड़ा-देवीधुरा लाइन
चंपावत। जिले के पहाड़ी हिस्से के दो लाख लोगों को दो रात बगैर बिजली के रहना पड़ा। दिसंबर 2014 में पांच दिन ऐसे ही हालात थे। बीते वर्षों में भी कई बार हो चुकी है। ब्लैक आउट के इस तरीके से बचा जा सकता था। अगर पिथौरागढ़ से लोहाघाट की लाइन के बाधित होने पर वैकल्पिक रूट ठीक होता। लमगड़ा-देवीधुरा लाइन चार वर्षों से खराब पड़ी है।
पिथौरागढ़-लोहाघाट लाइन का काफी हिस्सा जंगल के बीच से गुजरता है, जहां अक्सर पोल और लाइनों को नुकसान होता रहता है। इसके विकल्प के रूप में लमगड़ा से देवीधुरा की 33 केवी लाइन वैकल्पिक सहारा बन सकती थी। इस लाइन के ठीक होने से लमगड़ा से देवीधुरा सब स्टेशन को मिलने वाली बिजली का लाभ लोहाघाट और चंपावत क्षेत्र को मिलता। मगर यह लाइन बीते चार वर्ष से खराब है। 28 किमी लंबी इस लाइन को ठीक करने के लिए कई बार आवाज उठी। लेकिन लाइन की मरम्मत अब तक नहीं हो सकी है। उधर ईई राजेश कुमार का कहना है कि इस लाइन की मरम्मत के लिए दो लाख रुपये मंजूर हुए हैं। अल्मोड़ा जिले के जैंती में बिजलीघर बन रहा है। इसके पूरा होने के बाद लाइन को जोड़ा जाएगा।