धरती के भगवान डॉक्टर बीमार को मौत के मुंह से निकाल जीवन देते हैं, लेकिन यहां के जिला अस्पताल के हाल निराले हैं। जिला अस्पताल के एक डॉक्टर साहब खुद लंबे समय से बीमार हैं। चंपावत में ज्वाइनिंग के बाद से 358 दिनों में इन डॉक्टर साहब ने 310 दिन मेडिकल अवकाश लिया है।
6.06 करोड़ रुपये की लागत से बना जिला अस्पताल का भवन अपने नाम के अनुरूप लोगों को सुविधा नहीं दे पा रहा है। यहां मरीज अक्सर मामूली इलाज के लिए भी परेशान रहते हैं। कई बार गर्भवती महिलाओं को प्रसव तक की सुविधा नहीं मिल पाती है। ये प्रकरण भी बहुतायत में रेफर किए जाते हैं।
इस अस्पताल में वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डा.आरके सुंदरियाल ने 25 नवंबर 2014 को ज्वाइनिंग की, मगर 17 नवंबर 2015 तक के 358 दिनों में डा.सुंदरियाल ने 310 दिनों का मेडिकल अवकाश लिया। ये मेडिकल पांच बार में लिया गया है। संयुक्त निदेशक रेंक के डा.सुंदरियाल की मेडिकल की अवधि 18 दिनों से 80 दिनों तक है। मेडिकल में बीमारी का ब्यौरा पुरानी चोटों के उभरने, पीठ, कमर में दर्द आदि है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा.विनोद टोलिया ने कहा कि मेडिकल अवकाश सामान्य रूप से कर्मी का अधिकार है। संदेह की दशा में मामले को मेडिकल बोर्ड के सामने भेजने के अलावा दर्शाए रोग की भी जांच कराई जा सकती है। वहीं संपर्क नहीं होने से मेडिकल लेने वाले डॉक्टर का पक्ष नहीं जाना जा सका।
अब तक लिए गए मेडिकल अवकाश का ब्यौरा
-3 दिसंबर 2014 से 20 दिसंबर 2014 : 18 दिन
- 1 जनवरी 2015 से 1 मार्च 2015 : 60 दिन
- 9 मार्च से 25 मई 2015 : 78 दिन
- 30 मई से 11 अगस्त 2015 : 74 दिन
- 17 अगस्त से 4 नवंबर 2015 : 80 दिन
मेडिकल अवधि का वेतन अभी नहीं दिया गया है। ये तमाम मेडिकल प्रकरण स्वास्थ्य विभाग के कुमाऊं निदेशक को नैनीताल भेजे गए हैं। वहां से मंजूरी के बाद ही वेतन मिल सकेगा। -डा.एसबी ओली, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (चंपावत)
महज 11 है अधिकतम कार्यदिवस
यूं तो मरीजों का दर्द दूर करने वाले डॉक्टर का धर्म किसी तय समय में नहीं बंधा रहता, लेकिन यहां वरिष्ठ आर्थोपिक सर्जन के जिला अस्पताल में काम की अधिकतम अवधि ही 11 है। ये अवधि 21 दिसंबर 2014 से 31 दिसंबर 2014 तक की है।
काम दून में, वेतन चंपावत से
जिला अस्पताल में कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञ डा.राजीव पाल बीते दो माह से देहरादून में संबद्ध है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डा.पाल को निदेशालय के आदेश से राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत 19 सितंबर से देहरादून अटैच किया गया है। अलबत्ता वेतन चंपावत जिला अस्पताल से निकल रहा है।