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दीपावली में लोगों को लुभा रहे डिब्बा बंद उपहार

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चंपावत। वक्त बीतने के साथ ही त्यौहार मनाने का तरीका बदलने लगा है। प्रकाश पर्व दीपावली भी इससे अछूता नहीं है। दीपक से घरों को रोशन करने से लेकर उपहार देने के तौर तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उपहार देने की नई नई सामग्री से बाजार पटा हुआ है। कई तरह के डिब्बा बंद उपहार लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। मिठाई, जूस और ड्राई फ्रूट के पैकेटों से बाजार पटा हुआ है।

कारोबारी कमलेश राय और दीपक राय बताते हैं कि बीते कुछ सालों से दीपावली मनाने के ढंग में अंतर आ गया है। बाजार में इन दिनों आकर्षक सजावट और बनावट से बने ये डिब्बा बंद उपहार लोगों को लुभा रहे हैं। इन उपहारों में सोन पपड़ी, रसगुल्ला, गुलाब जामुन, सोहन हलवा, भेलपूरी और काजू बर्फी शामिल हैं। इनकी कीमत 60 से 600 रुपये तक है। उनका कहना है कि कीवी, लीची, मिक्स फ्रूट ,आम और संतरा के जूस के पैक भी बाजार में उपलब्ध है। जिनकी कीमत 150 से 400 रुपये तक है। इसके अलावा काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश के पैकेट भी बनाए गए हैं। जिनकी कीमत 300 से 1200 रुपये है। व्यापारी कमलेश राय का कहना है कि ये उपहार आकर्षक होने के साथ ही ले जाने में आसान है। यही वजह है कि ग्राहक इनको ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
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डिब्बा बंद पैकेट से मिठाई के कारोबार में आई कमी
चंपावत। डिब्बा बंद उपहार पैक आने से मिठाई के कारोबार में भी अंतर आया है। बालेश्वर मिष्ठान भंडार के मुक्तेश वर्मा का कहना है कि डिब्बा बंद मिठाई आने से व्यापार में 15 फीसदी की गिरावट आई है। लोग अब सोन पपड़ी, रसगुल्ला, गुलाब जामुन और काजू बर्फी के डिब्बा बंद पैक खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
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कम हो रहा है खिले बताशे का चलन
चंपावत। खिले बताशे के कारोबार में भी गिरावट आ गई है। व्यापारी आनंद सिंह मेहता का कहना है कि खिले और बताशे में पिछले पाचं सालों की तुलना में 25 फीसदी की कमी आई है। बुजुर्ग बालादत्त खर्कवाल का कहना है कि एक जमाने में खिले और बताशे से ही दीप पर्व मनाया जाता था। लेकिन आधुनिक समय में खिले और बताशे सिर्फ परंपरा निभाने तक ही सीमित रह गए हैं।





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