चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 28 स्थान बेहद संवेदनशील और खतरनाक है। इन स्थानों पर न केवल पहाड़ी से मलबा गिरता है बल्कि आवाजाही भी जोखिम भरी रहती है। ऐसे स्थानों के ट्रीटमेंट के लिए एनएच खंड ने भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
150 किलोमीटर लंबे टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी सड़क का काम अंतिम चरण पर है जबकि चल्थी पुल का काम अभी अधूरा है। वहीं एनएच पर आठवें मील, अमरूबैंड, सूखीढांग, सिन्याड़ी, चल्थी, बेलखेत, अमोड़ी, कोट अमोड़ी, स्वांला, धौन, भारतोली, घाट सहित 28 जगह संवेदनशील और खतरनाक हैं। एनएच खंड के ईई सुनील कुमार का कहना है कि इन संवेदनशील स्थानों की मरम्मत करने के लिए 190 करोड़ रुपये की डीपीआर भारत सरकार को भेजी गई है। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
चंपावत जिले की बंद 14 ग्रामीण सड़कें
चंपावत-मंच-तामली, सूखीढांग-डांडा-मीडार, गौड़ी-किमतोली, लफड़ा-स्यूली-बुड़ाखेत, लड़ाबोरा-क्वारसिंग, उदयूनढुंगा-खतेड़ा, धौन-बड़ोली, धौन-दियूरी, धौन-सल्ली, स्यांला-पोथ, चल्थी-नौलापानी, सिप्टी-अमकड़िया, अमोड़ी-छतकोट और एसएच 29 से खटोली मल्ली।
मलबा आने से पिथौरागढ़ जिले की आठ सड़कें बंद
पिथौरागढ़। मलबा आने से पिथौरागढ़ जिले की आठ सड़कें यातायात के लिए बंद हैं जबकि आठ सड़कें खोल दी हैं। चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क नौ दिन बाद भी नहीं खुली। रविवार सुबह घाट और दिल्ली बैंड के पास मलबा आने से पिथौरागढ़-घाट एनएच बंद रहा।
जिले भर में शनिवार की रात मूसलाधार बारिश हुई जिससे पिथौरागढ़-घाट एनएच पर बोल्डर आ गए। इसके चलते सुबह मैदानी क्षेत्र से आने वाले वाहनों के साथ ही पिथौरागढ़ से घाट की ओर जा रहे वाहन फंसे रहे। यात्रियों और चालकों ने भी बोल्डर हटाने का प्रयास किया। जेसीबी से सुबह सात बजे सड़क यातायात के लिए खोल दी गई। इसके बाद यातायात सुचारु हुआ।
आदिचौरा-सिमी, बांसबगड़-धामीगांव, मदकोट-तोमिक, छिरकिला-जम्कू, बैराट बौगाड़-बैराजुबर, सानदेव-तुरगोली, झूलाघाट-बलतड़ी, तवाघाट-घट्टाबगड़-लिपुलेख सड़कें अभी यातायात के लिए बंद हैं। तवाघाट-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में स्वांला में सड़क बंद होने से रविवार को टनकपुर, बरेली, दिल्ली, देहरादून जाने वाले यात्रियों को हल्द्वानी रूट से जाना पड़ा।