चंपावत। टनकपुर से पंचेश्वर तक सीधा सड़क संपर्क होने की उम्मीद बढ़ गई है। टनकपुर-जौलजीबी रोड का काम कर रही लोक निर्माण विभाग की पीआईयू (परियोजना क्रियान्वयन इकाई) ने इससे संबंधित प्रस्ताव भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा है। इसमें रूपालीगाड़ से पंचेश्वर तक 20 किलोमीटर सिंगल लेन रोड बनाने की योजना है। इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने पर पंचेश्वर से टनकपुर की सड़क से दूरी 54 किलोमीटर कम हो जाएगी।
131 किमी लंबे टनकपुर- जौलजीबी रोड पर ठुलीगाड़ से रूपालीगाड़ तक 43 किमी हिस्से को छह साल पहले मंजूरी मिली थी। टनकपुर से ठुलीगाड़ तक 12 किमी हिस्से में सड़क पहले ही बन चुकी है। प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से रूपालीगाड़ से जौलजीबी के बीच का काम लटका है। दो पैकेज (17.875 किमी का ठुलीगाड़ से चूका और 24.400 किमी का चूका से रूपालीगाड़) वाली इस सड़क में रूपालीगाड़ तक की कटिंग का काम पूरा हो चुका है। चूका तक डामरीकरण भी तकरीबन पूरा हो गया है। केवल चूका पुल बनना बाकी है।
पंचेश्वर बांध डूब क्षेत्र के मद्देनजर आगे की सड़क बनने में अड़चन आ रही है। अलबत्ता सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा और लोगों की जरूरत के मद्देनजर विभाग ने रूपालीगाड़ से पंचेश्वर तक 20 किलोमीटर का सिंगल लेन का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है। इसे अभी हरी झंडी नहीं मिली है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद योजना पूरी होने पर पंचेश्वर सहित सीमांत के कई ग्रामीण क्षेत्रों की मैदानी क्षेत्र टनकपुर से दूरी काफी कम हो जाएगी। इस वक्त पंचेश्वर के लोगों को लोहाघाट-चंपावत होते हुए टनकपुर जाना पड़ता है जिसके लिए 129 किमी दूरी तय करनी पड़ती है लेकिन रूपालीगाड़ होते हुए ये फासला 54 किमी कम होने पर दूरी 75 किमी रह जाएगी। इससे आवाजाही में लगने वाले समय में दो घंटे की कमी आने के अलावा किराए में भी 40 प्रतिशत की कमी आएगी।
टनकपुर-जौलजीबी सड़क पर ठुलीगाड़ से रूपालीगाड़ तक 43 किमी हिस्से की कटिंग पूरी हो चुकी है। ठुलीगाड़ से चूका तक तीन पुल और डामर का काम तकरीबन पूरा हो गया है। रूपालीगाड़ से पंचेश्वर तक 20 किमी में सिंगल लेन (छह मीटर चौड़ी) सड़क का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद वन भूमि, डीपीआर और अन्य कार्यवाही की जाएगी।
- आदर्श गोपाल, ईई, पीआईयू, टनकपुर।
एसएसबी की बीओपी को भी लाभ होगा
चंपावत। टनकपुर- जौलजीवी सड़क को पंचेश्वर से जोड़ने से पंचेश्वर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को तो लाभ होगा ही, इसका फायदा नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की पांच बार्डर आउटपोस्ट को भी मिलेगा। काली नदी के पास से बन रही सड़क सीमा पर सुरक्षा चौकसी तेज करने और एसएसबी की बीओपी तक मजबूत आधारभूत ढांचा बनाने में भी मददगार होगी। इस रोड का लाभ तल्लादेश के लोगों को भी मिलेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार पहले ही रूपालीगाड़ से तामली तक 14 किमी सड़क की मंजूरी देते हुए टोकन मनी जारी कर चुकी है।