चंपावत। सात फरवरी को स्वांला जीप दुर्घटना के बाद से वाहनों की आवाजाही को पर्वतीय क्षेत्र में प्रतिबंधित समय में रोका जाना हादसे से बचाव के मद्देनजर तो ठीक है, लेकिन कठोरता के साथ इस नियम के अनुपालन से टनकपुर से पास के गांव के लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत टनकपुर से आठ किलोमीटर दूर बस्टिया गांव के लोगों की हो रही है।
देरी की वजह से बीते आठ दिनों में यहां के कई लोग अपने घर के बजाय टनकपुर में रात काटने को मजबूर हुए हैं। बस्टिया के ग्राम प्रधान नवीन बोहरा इसे लेकर जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन से अनेक बार गुहार लगा चुके हैं, मगर अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी है। स्वांला जीप हादसे के बाद टनकपुर के पास ककरालीगेट के बैरियर को (रात सात बजे से सुबह पांच बजे तक) प्रतिबंधित वक्त पर नहीं खोला जा रहा है। हादसे से रोकथाम के चलते ये कदम उचित भी है।
लेकिन नियमों में व्यावहारिकता की अनदेखी से टनकपुर से आठ किमी दूर बस्टिया के लोगों को दिक्कतें आ रही है। ग्राम प्रधान नवीन बोहरा का कहना है कि बस्टिया के काफी लोग टनकपुर में कारोबार करते हैं। उन्हें घर पहुंचने के लिए देर हो जाती है। ककरालीगेट बैरियर की बंदी के चलते बस्टिया के ग्राम प्रधान नवीन बोहरा 12 फरवरी की रात को घर न पहुंच टनकपुर के होटल में रात काटने को मजबूर हुए। इसके अलावा कई अन्य ग्रामीणों को भी घर पहुंचने में दिक्कत हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि नया आदेश उनके लिए मुसीबत बन रहा है। अब उन्हें टनकपुर या मैदानी क्षेत्र में कहीं भी जाने पर रात को वापस आने की दिक्कत होती है। इस आदेश से बस्टिया के लोगों को छूट मिलनी चाहिए। यहां के लोगों को परिचय पत्र दिखाकर जाने दिया जाता था। यही व्यवस्था अब भी की जानी चाहिए। ग्राम प्रधान और ग्रामीण रात सात बजे बाद आवाजाही के लिए प्रशासन के आगे बीते आठ दिनों में तीन बार गुहार लगा चुके हैं। मगर अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी है। अलबत्ता बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक को भी इस संबंध में खत भेजा है।
कोट
पर्वतीय मार्गो में सुरक्षागत कारणों से वाहनों की आवाजाही रात के वक्त प्रतिबंध की गई है। केवल इमरजेंसी में ही आवाजाही की अनुमति दी जा सकती है। बस्टिया के लोगों को वक्त-बेवक्त आवाजाही की अनुमति के लिए विशेष पास पर विचार किया जाएगा। -धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक, चंपावत।