चंपावत के स्वाला डेंजर जोन में होता मरम्मत का कार्य। स्रोत: यात्री
चंपावत। चंपावत-टनकपुर एनएच पर स्वाला डेंजर जोन पर 21 करोड़ की लागत से हो रहे काम के पूरा होने के बाद 2026 में निर्बाध यातायात की उम्मीद है। पहाड़ी की तरफ के कार्य के लिए 12 करोड़ और सड़क के नीचे की तरफ सुरक्षा दीवार और ड्रेनेज कार्य के लिए नौ करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। वर्तमान तक करीब साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
चंपावत-टनकपुर एनएच पर डेंजर जोन पर वर्ष 2024 से ही एनएच काम कर रहा है। पिछले साल पहाड़ी से लगातार पत्थर और बोल्डर गिरा करते थे। हर वक्त हादसे का डर बना रहता था। तब पहाड़ी को ऊपर की तरफ से काट बैंच बनाने का काम किया गया। 2025 में स्थिति बदली और गारे के साथ मलबा और बीच-बीच में पत्थर गिरने लगे। खतरा कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ गया। इस स्थान पर सड़क पहाड़ी से लगातार आने वाले पानी के कारण धंस गई और खतरा और बढ़ गया। यहां पर चंपावत को जाने और वहां से आने वाले वाहन लगातार फंसते रहे। धक्के देकर या मशीन की मदद से उन्हें आगे बढ़ाना पड़ा। बरसात के दौरान तो एनएच पर पूरी तरह पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के लोगों के लिए सिरदर्द बना रहा। एनएच बंद होने से करोड़ों का नुकसान दोनों जिलों को उठाना पड़ा।
एनएच के ईई दीपक जोशी ने बताया कि वर्तमान में स्वाला डेंजर जोन पर रिटेनिंग वॉल बनाने का कार्य किया जा रहा है। मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ ही उचित पानी निकासी की व्यवस्था का काम हो रहा है। मार्च 2026 तक सड़क सुधारीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इधर सुधारीकरण कार्य के चलते एनएच पर यातायात बीच-बीच में रोकना पड़ रहा है।