चंपावत। हाई एल्टीट्यूट टाइगर प्रोजेक्ट के तहत पहाड़ में बाघ के अस्तित्व की खोज समाप्त हो गई है। वन विभाग ने बाघ की खोज करने के लिए तीन-चार टीमों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया था। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के ऊंचे इलाकों में जाकर बाघ की खोज शुरू की। टीम को वहां बाघ होने के कोई निशान नहीं मिले।
वन विभाग ने ऊंचे इलाकों में जाकर पंजे के निशान, पेड़ में खुरचे हुए निशान, मल ढूंढने की कोशिश की। खोज पूरी होने तक एक भी बाघ होने के निशान नहीं मिल पाए। इसके अलावा टीम ने गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से भी पूछताछ की। वन विभाग ने वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड के माध्यम से कैमरे भी लगाए थे मगर टीमों के हाथ खाली रहे।
इन क्षेत्रों में की गई बाघ की तलाश
चंपावत। जिले में वन विभाग की टीम ने भिंगराड़ा, देवीधुरा, लोहाघाट, काली कुमाऊं और चंपावत क्षेत्रों में टाइगर की तलाश की।
27 कर्मचारियों को दिया गया था प्रशिक्षण
चंपावत। बाघ के अस्तित्व की खोज करने के लिए 27 वन कर्मियों को पिथौरागढ़ में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान कर्मियों को बाघ की खोज करने की विस्तार से जानकारी दी गई थी।
पहाड़ी इलाकों में बाघ के अस्तित्व की खोज पूरी हो गई है। बाघ की खोज के लिए सितंबर में टीम को प्रशिक्षण देकर जंगलों में भेजा गया था। टीम को बाघ के निशान नहीं मिल पाए।
- केएस बिष्ट, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।