चंपावत। जिले के दूरस्थ डांडा, ककनई और बुड़म गांव के 40 से अधिक छात्र-छात्राओं को 2019 में होने वाली उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के लिए 52 किलोमीटर दूर टनकपुर के परीक्षा केंद्र जाना होगा। इस दूरी में 45 किमी सड़क मार्ग के अलावा सात किमी पैदल फासला भी शामिल है। अधिक दूरी के चलते इन गांवों के परीक्षार्थियों को गांवों को छोड़ टनकपुर में किराये में रहने को मजबूर होना पड़ेगा जिससे उन्हें परेशानी के साथ ही काफी खर्च भी उठाना पड़ेगा।
डांडा जीआईसी के छात्रों का इस बार परीक्षा केंद्र तो बदला है, मगर आमबाग से एक किमी दूर टनकपुर जीआईसी में। ग्रामीण प्रेम सिंह, श्याम सिंह, रमेश, हरीश सिंह आदि का कहना है कि परीक्षा अवधि में टनकपुर में किराये में कमरा, भोजन आदि में करीब पांच हजार रुपये खर्च हो जाता है। इसके अलावा नई जगह पढ़ाई करने का असर परीक्षा के नतीजे पर भी पड़ता है। खास बात यह रही कि छात्रों की दिक्कतों के बावजूद डांडा को परीक्षा केंद्र बनाए जाने का प्रस्ताव तक नहीं भेजा गया है।
इस बार कम हो गया एक परीक्षा केंद्र
बोर्ड परीक्षा के लिए चंपावत जिले में 2019 के लिए कोई नया परीक्षा केंद्र तो नहीं बना, उल्टा एक केंद्र कम हो गया। मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित ने बताया कि आमबाग राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का परीक्षा केंद्र कम छात्र संख्या के चलते बंद कर दिया गया है। इस केंद्र के 36 परीक्षार्थी अब टनकपुर के जीआईसी में परीक्षा देंगे। वहीं केंद्र कम होने से अब जिले के 40 परीक्षा केंद्रों में 8482 (हाईस्कूल के 4771 और इंटर के 3711) अभ्यर्थी इम्तिहान देंगे। ये संख्या पिछली बार से 185 कम है।
मानकों के तहत किसी परीक्षा केंद्र को बनाए जाने के लिए कम से कम 75 परीक्षार्थी जरूरी है। दूरी और विशेष परिस्थितियों के मद्देनजर इस मानक को डीएम के आदेश पर शिथिल किया जा सकता है। दूरस्थ डांडा जीआईसी को बोर्ड का परीक्षा केंद्र बनाए जाने का प्रस्ताव नहीं मिला था। इसके चलते इस केंद्र से संबंधित प्रस्ताव रामनगर स्थित बोर्ड कार्यालय नहीं भेजा गया।
- आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।