चंपावत। नगर पालिका की ओर से स्वच्छ भारत अभियान के तहत जारी की गई केंद्र सरकार की गाइड लाइन का पूरा पालन कराया जा रहा है। अभियान के तहत जिला मुख्यालय में तीन नए स्थानों में हाइटैक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा नगर पालिका की भूमि में सार्वजनिक मूत्रालयों का निर्माण भी किया जाएगा। इसके लिए नगर पालिका की ओर से विभिन्न स्थानों में भूमि चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र तिवारी ने बताया कि अभियान के तहत पहले से निर्मित सार्वजनिक सुलभ शौचालयों की मरम्मत कर पुनर्निर्माण किया जा रहा है। वार्ड संख्या एक छतार के अलावा कोतवाली के समीप तथा खटकना पुल में हाइटैक शौचालय का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। इन शौचालयों के निर्माण के लिए राज्य वित्त मद में बजट की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड कूड़ा प्रतिषेध अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थानों में कूड़ा फेंकने वालों पर लगातार चालान और जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है।
नगर पालिका के वाहनों में पर्यावरण को संरक्षित रखने के संदेश प्रसारित करने के साथ कूड़े का उठान किया जा रहा है। नगर में जैविक और अजैविक कूड़े को उठाने के लिए प्रायोगिक तौर पर चलाए गए ई रिक्शा का प्रयोग सफल रहने पर अब जल्द ही सभी वार्डों में ई रिक्शा के जरिए प्रतिदिन कूड़ा उठान किया जाएगा।
पथ प्रकाश व्यवस्था के लिए लगेंगे 15 नए ट्रांसफार्मर
चंपावत। नगर पालिका के विभिन्न वार्डों में पथ प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 200 पोलों के साथ ही 15 स्थानों पर नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। विभिन्न वार्डों में हाई और लो वोल्टेज की समस्या रहने और पथ प्रकाश के लिए लगाई गई एलईडी लाइटों के अक्सर खराब होने के चलते नए ट्रांसफार्मर लगाने का निर्णय लिया गया है। डीएम डॉ.अहमद इकबाल के निर्देश पर पावर कारपोरेशन की ओर से नए ट्रांसफार्मर क्रय कर लिए गए हैं। जिन्हें जल्द ही आवश्यकता वाले स्थानों में स्थापित कर दिया जाएगा।
रोडवेज बस स्टेशन में होगा रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रयोग
चंपावत। नगर पालिका की ओर से निर्माणाधीन रोडवेज बस स्टेशन में बनाए जा रहे हाइटैक शौचालय के निर्माण में पहली बार रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संग्रह) का प्रयोग किया जा रहा है। पालिकाध्यक्ष के अनुसार बस स्टेशन में महिला और पुरुषों के लिए चार-चार शौचालय बनाए जाने के साथ ही दो स्नानागारों का निर्माण भी किया जा रहा है। इन शौचालयों और स्नानागार में बरसात के दौरान संग्रहीत किए गए पानी का प्रयोग किया जाएगा।