बोन कैंसर रोग से जूझ रही बाराकोट पाडासोंसेरा की ज्योति के उपचार के लिए उसके पिता को आर्थिक सहायता
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चंपावत। बाराकोट ब्लॉक के पड़ासूसेरा गांव की हाईस्कूल की छात्रा छह माह पहले तक ठीक से चलती थी, लेकिन एक चोट ने उसकी जिंदगी की खुशियां छीन लीं। पांव की मामूली चोट अब कैंसर में बदल चुकी है। दो लाख रुपये खर्च करने के बाद छात्रा की हालत ठीक नहीं है। अब इस छात्रा को चलने-फिरने के लिए परिजनों की मदद लेनी पड़ती है।
जोरशोर से शुरू की गई आयुष्मान योजना का लाभ कई बार गरीब वर्ग को नहीं मिल पा रहा है। पड़ासूसेरा गांव की ज्योति अधिकारी के साथ भी ऐसा ही हुआ। दिसंबर में स्कूल में बैडमिंटन खेलते वक्त पांव मुड़ा और घुटने के निचले हिस्से में मामूली चोट आई। पिता खीम सिंह बताते हैं कि दो हफ्ते तक घरेलू इलाज किया, लेकिन ठीक होने के बजाय घुटने में पानी भर गया। अस्पताल में इंजेक्शन के जरिये घुटने का पानी निकाला, लेकिन इसके बाद सूजन शुरू हो गई। लोहाघाट, पीलीभीत में हालत में सुधार न होने पर ऋषिकेश, मेरठ, दिल्ली के अस्पताल तक पहुंचे, लेकिन यहां कोविड की वजह से इलाज नहीं मिल सका।
खीम सिंह बताते हैं कि इस दौरान आयुष्मान कार्ड से कहीं इलाज नहीं मिला। दो लाख पांच हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन हालत में सुधार होने के बजाय घुटने में सूजन और घाव बढ़ता गई। अब स्थिति यह है कि बैडमिंटन खेलने वाली ज्योति खुद चल भी नहीं पाती। पिता कहते हैं कि परिवार के दो लोग उसे घर से अंदर-बाहर ले जा रहे हैं। इधर आयुष्मान योजना के समन्वयक मनोज पांडेय का कहना है कि आयुष्मान कार्ड का लाभ क्यों नहीं मिला, इस बारे में संबंधित अस्पताल ही बता सकता है।
दिल्ली एम्स में इलाज को आगे आए लोग
लोहाघाट (चंपावत)। हड्डी के कैंसर से जूझ रही ज्योति अधिकारी का गीतांजलि सेवा संस्थान दिल्ली एम्स में इलाज कराएगी। संस्था के अध्यक्ष सतीश चंद्र पांडेय ने बताया कि सीमांत सेवा फाउंडेशन के सहयोग से ज्योति को एम्स भर्ती कराने की तैयारी शुरू की गई है। पांडेय ने ज्योति के घर जाकर आर्थिक सहायता देने के साथ उनके परिवार के लिए खाद्यान्न आदि की भी व्यवस्था की। मौके से ही फाउंडेशन के डॉ. सिद्धार्थ पाटनी और रणदीप पोखरियाल को सूचना दी। बताया गया कि जल्द ही ज्योति को एम्स भर्ती कराने के साथ ही सारा खर्च उठाएंगे। (संवाद)