चंपावत। पंचेश्वर बांध के विस्थापितों का मसला राज्य सरकार को करना है। केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन एस मसूद हुसैन का यह कहना है। प्रदेश सरकार पहले ही इस मसले को बड़ा बताते हुए केंद्र से सहयोग लेने की बात कह चुकी है। बृहस्पतिवार को मसूद ने अन्य अधिकारियों के साथ बांध क्षेत्र का दौरा भी किया।
परियोजना में विस्थापन एक बड़ा सवाल है। पिछले साल विभिन्न क्षेत्रों में हुई सुनवाई में भी यही मुद्दा मुख्य रूप से उठा था। प्रदेश के वित्तीय संसाधनों की स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार इस मामले में केंद्र सरकार से मदद पाने की कोशिश भी कर रही है। ऐसे मेें केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन ने विस्थापन के मसले को राज्य सरकार के पाले में धकेल कर इस सवाल को और तीखा कर दिया है।
प्रस्तावित बांध परियोजना के तहत तीन जिलों के 134 ग्राम पंचायतों के परिवारों को विस्थापित किया जाना है। जिसमें पिथौरागढ़ के 87, चंपावत के 26 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव शामिल हैं। बांध निर्माण में सर्वाधिक विस्थापित परिवार पिथौरागढ़ जिले के हैं। चंपावत जिले की तहसील चंपावत और पाटी के दो-दो तथा लोहाघाट और बाराकोट तहसील के 11-11 गांव प्रभावित होंगे। तहसील बाराकोट के ग्राम नैत्र व पाटी का सिमलखेत गांव पूर्ण रूप प्रभावित होंगे। जबकि तहसील बाराकोट के गॉव-बेट्टा, सुलान, सुगंरखाल, बौतड़ी मग गूॅठ, कोठेरा, सिंगदा, ब्यूरी, गाइकाझूला, चूलागांव, रैगांव तथा तहसील लोहाघाट के खाईकोट तल्ला, विबिल, खाइकोट मल्ला, निडिल, जिंडीसोराड़ी, बगौटी, डुगंरालेटी, पासम, असलाण, जमरसौ, मटियानी और तहसील चंपावत के बचकोट, पोलप तथा तहसील पाटी का चिलिन्या गांव आंशिक प्रभावित होंगे।
केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष सहित अन्य उच्च अधिकारियों ने दौरे से अब पंचेश्वर बांध के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है।
बृहस्पतिवार को केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन एस मसूद हुसैन, सीडब्लूसी सदस्य और अतिरिक्त जल संसाधन सचिव एसके हालदार, सचिव एमएस रेड्डी और केंद्रीय विद्युत अथारिटी बोर्ड के मुख्य अभियंता प्रकाश चंद्र आदि ने प्रस्तावित बांध के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया।
पंचेश्वर बांध प्राधिकरण (पीडीए) के अलावा बांध की परियोजना रिपोर्ट तैयार करने वाली वैप्कोस कंपनी के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। गत वर्ष केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव अमरजीत सिंह ने भी बांध स्थल का निरीक्षण कर अब तक हुए कार्यो का जायजा लिया था। बांध निर्माण को लेकर अब तक पर्यावरणीय जन सुनवाइयों के अलावा खुली बैठकों समेत तमाम प्रक्रियाएं एक साल पहले ही पूरी हो चुकी हैं। चंपावत जिले के डूब क्षेत्र में 19 विभागों की करीब 1.60 अरब रुपये से की परिसंपत्तियां प्रभावित होंगी।