लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट तहसील का कामकाज 13 किमी दूर बैठे लोहाघाट के अफसरों के जिम्मे है। संचालन के लिए तहसील में एसडीएम का पद भी सृजित नहीं है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पद भी खाली पड़े हैं। इससे लोगों को काफी परेशानी होती है। उनका कहना है कि जब तहसील में कोई अधिकारी की तैनाती ही नहीं करनी थी तो तहसील बनाने का क्या औचित्य है। उन्होंने जल्द से जल्द तहसील में अधिकारियों की तैनाती करने की मांग की है।
ग्रामीणों को सुविधा देने के लिए 20 जनवरी 2014 को बाराकोट उप तहसील को उच्चीकृत कर तहसील का दर्जा दिया गया। मगर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, न्यायिक निरीक्षक, राजस्व लेखाकार जैसे महत्वपूर्ण पद नहीं भरे गए। केवल एक नायब नाजिर के जिम्मे तहसील को छोड़ दिया गया। 10 राजस्व क्षेत्रों में से सात की पुलिस का जिम्मा भी राजस्व विभाग के पास है। नायब तहसीलदार न होने से राजस्व पुलिस क्षेत्र में होने वाली वारदातों के निपटारे में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा तहसील में भूमि दाखिल खारिज, जांच रिपोर्ट समय से नहीं बन पा रही हैं। 13 किमी दूर के अफसरों के हवाले यहां का जिम्मा होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। तहसील में मोबाइल नेटवर्किंग भी ठीक नहीं है, जिससे प्रमाणपत्र बनाने में दुश्वारी हो रही है। लोहाघाट की तहसीलदार नीलू चावला का कहना है कि इसे स्वान केंद्र से जोड़ने का काम चल रहा है जिसके बाद स्थिति में सुधार होगा।
तहसील में सक्षम अधिकारियों के पद खाली होने की मार लोग भुगत रहे हैं। इसके चलते लग रही लोहाघाट की दौड़ की वजह से वक्त और धन की बर्बादी हो रही है।
संजय जोशी (10 एलएचजी 02पी)
ग्राम प्रधान, नौमाना।
तहसील बनने के चार साल बाद भी एसडीएम का पद सृजित नहीं होने से ग्रामीणों को स्थायी प्रमाणपत्र आदि बनाने के लिए लोहाघाट दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
राजू अधिकारी (10 एलएचजी 03पी)
सामाजिक कार्यकर्ता।
बाराकोट तहसील में रिक्त पड़े अधिकारियों के पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। अधिकारियों की कमी से काम चलाना कठिन हो रहा है।
- आरसी गौतम, एसडीएम, लोहाघाट।