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आठ दिन बाद कार्यमुक्त हुए शिक्षक ललित मोहन

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चंपावत। ललित मोहन को अतिथि शिक्षक के रूप में चंपावत विकासखंड के राजकीय इंटर कॉलेज गूंठ गरसाड़ी में 9 सितंबर को तैनाती मिली। और 16 सितंबर को उनका कार्यकाल पूरा हो गया। यानि महज 8 दिन में वे फिर से बेरोजगार हो गए। वजह स्कूल में हिंदी विषय के स्थाई शिक्षक की तैनाती होना। अब यह पूर्व अतिथि शिक्षक यहां समायोजन की मांग को दर-दर भटक रहा है। और ये हाल तब है, जब जिले के चार स्कूलों में इस विषय के शिक्षक नहीं हैं।

ललित मोहन पिछले साल बाजपुर के जीआईसी सुलतानपुर में नवंबर 2016 से इस साल मार्च तक अतिथि शिक्षक रहे। पांच माह से अधिक वक्त तक बेरोजगार रहने के बाद उन्हें सितंबर में 8 दिन तक शिक्षण कार्य मिला। और फिर स्थाई शिक्षक आने से काम से हाथ खाली हो गए।
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जबकि पाटी विकासखंड के गरसाड़ी जीआईसी, बालातड़ी व बिनवालगांव जीआईसी और लोहाघाट विकासखंड के डूंगराबेहरा राजकीय हाईस्कूल में हिंदी विषय में सहायक शिक्षक के पद खाली हैं। शिक्षा अधिकारी से इन स्कूलों में समायोजन की मांग करते हुए ललित मोहन सहित संगठन चक्कर काट चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ अध्यापक नहीं होने से पढ़ाई नहीं हो पा रही है, वहीं काम नहीं मिलने से अतिथि शिक्षकों को काम के लिए तरसना पड़ रहा है।
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नियमों के तहत अतिथि शिक्षक की तैनाती उन्हें अनुबंधित स्कूल में ही की जा सकती है। स्थाई शिक्षक की नियुक्ति के बाद अतिथि शिक्षक को उस विद्यालय में नहीं रखा जा सकता है। प्रभावित अतिथि शिक्षक के मामले में निदेशक को भेजा गया है।
आरसी पुरोहित,
मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
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