बनबसा (चंपावत)। क्षेत्र में पचपकरिया, गढ़ीगोठ और बनबसा की रामलीला मंचन जारी है। मंगलवार की रात को पचपकरिया रामलीला मंचन में मंत्री सुमंत और राजा दशरथ संवाद के भावपूर्ण दृश्य पर दर्शक महिलाऐं रो पड़ी। सुमंत द्वारा किए विलाप अवध में क्या मुंह ले जाऊं, कहूं क्या पूछे जब राजा, राम लखन वन को गए मैं आया चहुंचाए ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। सुमंत का पात्र जसवंत बसेड़ा और दशरथ का पात्र राजेंद्र जोशी उर्फ राजू ने निभाया। मंगलवार को दशरथ मरण तक की लीला का मंचन हुआ। उधर पूर्णागिरि उत्थान मंच गढ़ीगोठ और रामलीला कमेटी बनबसा द्वारा आयोजित रामलीला मंचन में दशरथ मरण तक का भावपूर्ण मंचन हुआ।
मेकअप कला के माहिर हैं केवल पांडेय
बनबसा (चंपावत)। रामलीला मंचन के पात्रों को उनकी भूमिका निभाने में मेकअप का भी खासा महत्व रहता है। जिसे कुशल मेकअप मैन अपने सधे हाथों से जीवंत कर देता है। बनबसा रामलीला के पात्रों को मेकअप से सजीव करने वाले मेकअप कलाकार हैं केवल पांडेय। कभी रामलीला मंचन में विभिन्न पात्रों को अपनी भूमिका से सजीव करने वाले केवल पांडेय पिछले बारह वर्षों से मेकअप मैन की कुशल भूमिका निभा रहे हैं। उनके मेकअप द्वारा तैयार पात्र अपनी भूमिका में सजीव हो उठते हैं। केवल पांडेय वर्ष 1997 से रामलीला मंचन से जुड़े। उन्होंने तारा, देवगण, जटायू, जामवंत, विश्वामित्र, जनक, उर्मिला, सुमंत, दशरथ आदि पाठ खेल चुके हैं। वर्ष 2006 से वे लगातार मेकअप मैन की भूमिका निभा रहे हैं।
रावण के नाम से बनाई पहचान बसेड़ा ने
बनबसा (चंपावत)। अभिनेता,नेता और खिलाड़ी के रूप में चर्चित जसवंत सिंह बसेड़ा को क्षेत्र में रावण के नाम से भी जाना जाता है। छात्र जीवन से ही रामलीला मंचन में विभिन्न पात्र निभाने वाले बसेड़ा ने मेहता प्रोडक्शन की चेली और अनमोल प्रोडेक्शन की सिपैजी नामक फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई है।
वर्ष 1982 से रामलीला मंचन में विभिन्न पात्रों के रूप में अभिनय करने वाले बसेड़ा वर्तमान में रावण के पात्र के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। रावण के रूप में गढ़ीगोठ, फागपुर और अब पचपकरिया की रामलीला में बसेड़ा ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। उन्होंने वर्ष 1982 में डीडीहाट के हरड़कटिया गांव की रामलीला से अभिनय शुरू किया। सैनिक पिता के बनबसा सेना छावनी में तैनाती के समय उन्होंने फागपुर रामलीला मंचन में भाग लिया। वह अहिल्या, भरत, मेघनाथ, परशुराम, दशरथ, जनक, मारीच, खरदूषण, अंगद, मकरध्वज, वाणसुर, सुमंत, अहिरावण का पाठ खेल चुके हैं। े पिछले दस वर्षों से लगातार रावण का पाठ खेल रहे हैं। बसेड़ा इस समय कृषि उत्पादन मंडी समिति के उपाध्यक्ष हैं।