चंपावत। लोहाघाट नगर पंचायत की सीट पर अपना प्रत्याशी न होते हुए भी कांग्रेस की साख दाव पर लगी हुई है। कांग्रेस ने यहां निर्दलीय का समर्थन किया है और निर्दलीय को जिताने की चुनौती का सामना उन्हें करना पड़ रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष और जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रतिष्ठा से भी यह सीट जुड़ गई है। दूसरी ओर, भाजपा विधायक पूरन सिंह फर्त्याल के सामने भी पार्टी प्रत्याशी को जिताने की चुनौती है।
जिले की चार नगर निकायों में से कांग्रेस ने तीन (चंपावत और टनकपुर नगर पालिका तथा बनबसा नगर पंचायत) में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। पार्टी ने लोहाघाट सीट को खाली छोड़ दिया। लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र की एकमात्र नगर निकाय सीट होने के बावजूद उसने ये फैसला किया।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद हुए तीन नगर पंचायत के चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट कभी जीती भी नहीं। फरवरी 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से शिकस्त खाने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी और कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम देव ने इस सीट पर भाजपा को रोकने के लिए नया दांव चला। पार्टी ने लोहाघाट नगर पंचायत के 1998 और 2008 में अध्यक्ष रहे निर्दलीय उम्मीदवार भूपाल सिंह मेहता को समर्थन देने का निर्णय लिया। इस नए फैसले के चलते अब कांग्रेस के लिए इस सीट पर न केवल भाजपा को शिकस्त देने की चुनौती है, बल्कि निर्दलीय मेहता को विजयी बनाने का लक्ष्य भी है।
भाजपा के लिए भी यह खासा मायने रखता है। दूसरी बार विधायक बने भाजपा नेता पूरन सिंह फर्त्याल के लिए इस सीट में पहली बार कमल खिलाने की चुनौती होगी। पार्टी ने दीपक ओली को दूसरी बार प्रत्याशी बनाया है। राज्य बनने के बाद से अब तक हुए चुनाव में लोहाघाट अध्यक्ष की कुर्सी पर कभी भी भाजपा नहीं जीत सकी। 2013 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी से बगावत कर लता वर्मा ने चुनाव लड़ा और भारी अंतर से जीत दर्ज की। बाद में वे भाजपा में शामिल भी हुई। इस बार उनके पति गोविंद वर्मा को टिकट नहीं मिलने से पूर्व अध्यक्ष ने पति सहित पार्टी छोड़ दी। गोविंद वर्मा निर्दलीय के रूप में मैदान में है।
पार्टी का सिंबल नहीं मिला, निर्दलीय लड़ रहे कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष
कांग्रेस ने लोहाघाट सीट से किसी को प्रत्याशी नहीं बनाया, मगर कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष ओंकार धौनी निर्दलीय के रूप में मैदान में है। धौनी ने अध्यक्ष की सीट पर दावेदारी की थी, लेकिन संगठन ने उनकी दावेदारी को मंजूर नहीं करते हुए सीट खाली छोड़ी।