चंपावत। जिले में बजट के अभाव में नए किसानों को किसान पेंशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। चार वर्ष पूर्व 2014 से लागू की गई किसान पेंशन योजना के तहत जहां 1355 लाभार्थियों का चयन किया गया, वहीं वर्तमान तक एक भी किसान पेंशन लाभार्थी नहीं बढ़ पाया है।
वर्तमान में जिन लाभार्थियों को किसान पेंशन सुविधा का लाभ मिल भी रहा है तो बजट के अभाव में काफी अर्से के बाद मिल रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में किसानों को नौ माह बाद पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। सहायक समाज कल्याण अधिकारी दीपक गहतोड़ी ने बताया कि किसान पेंशन योजना के 1305 लाभार्थियों के खाते में पेंशन की धनराशि हस्तांतरित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि बजट देरी से जारी होने के कारण कुछ लाभार्थियों को नौ माह की और कुछ लाभार्थियों को छह माह की पेंशन का भुगतान किया गया है। जिले में किसान पेंशन सुविधा के लिए किसानों की ओर से आवेदन तो किए जा रहे हैं, लेकिन बजट की कमी के कारण आवेदनों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
चार सालों में हो चुकी है 50 किसानों की मौत
चंपावत। जिले में वर्ष 2014 से शुरू की गई किसान पेंशन योजना के तहत 1355 किसानों को पेंशन के लिए चयनित किया गया था। चार सालों में किसान पेंशन योजना का लाभ उठा रहे 50 किसानों की मौत हो चुकी है। जिस कारण वर्तमान में 1305 किसानों को एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन का भुगतान किया जा रहा है।
केवल शिगूफा रहा जगरिये-डंगरिये की पेंशन
चंपावत। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय में जागर लगाने वाले जगरिये और देवतारी करने वाले डंगरियों को भी पेंशन सुविधा दिए जाने का ऐलान किया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चुनावों में इस उपलब्धि को भुनाने का प्रयास भी किया। लेकिन इस संबंध में किसी प्रकार का शासनादेश जारी नहीं होने से जगरिये-डंगरिये की पेंशन केवल शिगूफा बन गई है।