लोहाघाट (चंपावत)। नेपाल सीमा से सटी ग्राम पंचायत डुंगराकोटी में खुले में शौच मुक्त करने के दावे की पड़ताल करने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कई ऐसे लोगों की ओर से भी शौचालय बनाना दिखाया गया है जिनका छह साल पहले निधन हो गया था। यह जानकारी लेने के लिए भी लोगों को सूचना के अधिकार के अधिनियम का इस्तेमाल करना पड़ा। लोगों ने बजट की बंदरबांट की आशंका जताते हुए अब जिलाधिकारी से इस मामले की जांच की मांग की है।
सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने वाली पीएलवी (अर्द्ध विधिक स्वयंसेवक) उषा देवी ने बताया कि डुंगराकोटी के लोगों ने उससे शिकायत की थी कि शौचालय बने हुए तीन साल हो गए और अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। कोशिश की गई कि इस मामले में सत्यता का पता लग सके।
कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने सूचना के अधिकार का उपयोग किया। आरटीआई में पता चला कि 2012 से अब तक स्वजल परियोजना से ग्राम पंचायत में बनाए गए शौचालयों के निर्माण में अनियमितताएं हैं। कई ऐसे लोगों का नाम लिस्ट में जिनका वर्ष 2012 से निधन हो गया है। कई लोगोें का नाम दो बार लिस्ट में आया है और कुछ ऐसे लोगों के नाम भी इस सूची में हैं जिनका गांव में कोई भी पता नहीं है। 25 साल से गांव से बाहर रह रहे लोगों को भी शौचालयों के लिए रुपया मिला है। उन्होंने बताया कि गांव में कई लोगों को तीन साल से शौचालय बनाने के बाद भी रुपया नहीं मिला है। आरटीआई में मिली सूची में कुल 26 नाम शामिल हैं।
यह हाल तब है जबकि चंपावत जिला पूर्ण रूप से खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है। पहले भी सामने आया है कि ओडिएफ के नाम पर कई जगह घोर लापरवाही बरती गई है। पीएलवी का कहना है कि इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से की गई है। जिलाधिकारी एसएन पांडे से बात नहीं हो पाई और उपजिलाधिकारी आरसी गौतम ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। इस मामले की जांच कराई जाएगी।