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राहत:एक साल बाद शुरू हुआ हड्डी का इलाज

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चंपावत। जून 2016 के बाद से चंपावत जिले के सबसे बड़े अस्पताल जिला अस्पताल में एक साल से अधिक समय के बाद हड्डी से संबंधित इलाज दुबारा शुरू हो गया है। अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक व वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.एसबी ओली का पिछले साल जून में यहां से स्थानांतरण हो गया था। लेकिन उनके स्थान पर प्रतिस्थानी की तैनाती नहीं की गई थी। नतीजा यह हुआ कि एक वर्ष से अधिक समय बीत गया, जिला अस्पताल में हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को बाहर रेफर किया जाता था। चंपावत ही नहीं, जिले में कहीं भी अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं होने से न केवल हड्डी से संबंधित बीमारियों के उपचार व दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने में भी परेशानी हो रही थी। लंबे समय बाद अब इस समस्या से निजात मिल गई है। सितारगंज से आए अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.एचएस ऐरी ने चंपावत जिला अस्पताल में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने पहले दिन एक प्लास्टर करने के अलावा 18 मरीजों की हड्डी से जुड़ी परेशानी को दूर किया।
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मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी का कहना है कि अस्थि रोग विशेषज्ञ का पद भरने से लोगों को लाभ मिलने लगा है। अस्पताल प्रशासन ने अब यहां इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) के तीन पद सहित निश्चेतक की तैनाती के लिए निदेशालय से आग्रह किया है। सीएमओ डॉ.एमएस बोहरा का कहना है कि जिले में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने का प्रयास किया जा रहा है।
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लोहाघाट के डॉक्टर ने भी चार्ज लिया
चंपावत जिले में दो सप्ताह पूर्व तक एक भी अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं थे। लेकिन शासन द्वारा किए गए स्थानांतरण के बाद यहां दो हड्डी रोग विशेषज्ञ हो गए हैं। पीपीपी मोड निरस्त होने के बाद लोहाघाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी नवंबर 2016 से हड्डी का इलाज नहीं हो पा रहा था। बागेश्वर से स्थानांतरित होकर आए अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार जोशी के यहां कार्यभार ग्रहण करने के बाद सीएचसी लोहाघाट में भी हड्डी का इलाज शुरू हो गया है। पाटी, बाराकोट, लोहाघाट विकासखंड के अलावा सीमावर्ती नेपाल के मरीज आने से लोहाघाट अस्पताल में जिले की सबसे अधिक मरीज इलाज को आते हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज मिलने से ग्रामीण व निर्धन मरीजों की जेब ढीली होने से बच जाएगी।
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