चंपावत। छोटे जिले चंपावत की आबादी तो कम है, लेकिन यहां चुनौतियां काफी ज्यादा हैं। खासकर बेरोजगारी के मामले में यहां चिंताएं लगातार बढ़ रही है। 18 से 35 आयु वर्ग का हर तीसरा युवक रजिस्ट्रड बेरोजगार है। जिले में बीते एक दशक में हर साल 1361 नौजवान बेरोजगारों की फौज में शामिल हो रहे हैं।
युवा देश के नौजवानों को नौकरी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। जिले की 2.65 लाख की आबादी में 76,136 लोग 18 से 35 आयु वर्ग के हैं। इस आयु वर्ग में से करीब 11 हजार लोग उच्च शिक्षा या तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। बचे 65 हजार में से 25 हजार से अधिक नौजवान रोजगार के इंतजार में हैं। सेवायोजन विभाग के प्रशासनिक अधिकारी सुरेश कुमार का कहना है कि इस साल सितंबर तक जिले में 9430 महिलाओं सहित कुल 25212 युवा बेरोजगार हैं।
खास बात यह है कि बेरोजगारी की दर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। एक दशक पूर्व यानि 2006 में जिले में मात्र 12026 बेरोजगार थे। जो दस वर्षों में 13186 बढ़कर 25212 तक पहुंच गए हैं। मतलब यह कि जिले में बेरोजगारों की फौज में हर साल 1361 नए युवा शामिल हो रहे हैं। वैसे बेरोजगारों की ये संख्या सरकारी तौर पर है। असल बेरोजगारों की संख्या इससे करीब 55 प्रतिशत अधिक है। वहीं बीते एक दशक में रोजगार पाने वालों की संख्या महज 713 रही है।
शिक्षाविद् और पुलहिंडोला जीआईसी के रिटायर्ड प्रधानाचार्य बंशीधर कलौनी का कहना है कि रोजगार की कमी ऊर्जावान नौजवानों में कुंठा पैदा करती है। बेरोजगारी आर्थिक ही नहीं, कई तरह की सामाजिक समस्याओं को भी बढ़ाती है।
चंपावत जिले में करीब डेढ़ हजार प्रशिक्षित बेरोजगार हैं और उनके सापेक्ष पद भी हैं, लेकिन नियुक्ति नहीं किए जाने से बेरोजगार तो दोराहे में है ही, साथ ही स्कूलों और अन्य विभागों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। -मंदीप ढेक, राज्य आंदोलनकारी, चंपावत।
भत्ते का दो साल से इंतजार कर रहे 1615 बेरोजगार
रोजगार न सही बेरोजगारी भत्ते से नौजवान संतोष कर रहे थे, मगर सितंबर 2014 से इन बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ते के रूप में एक रुपया भी नहीं मिला है। जिले में 1615 नवयुवक बेरोजगारी भत्ते के दायरे में है। सेवायोजन विभाग का कहना है कि इन बेरोजगारों को भत्ते की रकम देने के लिए 1.94 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसकी विभाग से मांग की गई है।