फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मालदार नहीं किसानों को कर्जदार बना रही हैं ऋण योजनाएं

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
चंपावत। किसानों की समस्याओं को लेकर वर्तमान में पूरे देश में माहौल गरमाया हुआ है। जिसकी आंच धीरे धीरे पर्वतीय जिलों तक भी पहुंचने लगी है। किसानों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कृषि और उद्यान विभाग की ओर से तमाम योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। किसानों की सहायता के लिए विभिन्न बैंकों अथवा साधन सहकारी समितियों के माध्यम से कर्ज भी उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में संचालित की जा रही अधिकांश कृषि ऋण योजनाएं किसानों को मालदार नहीं बल्कि और अधिक कर्जदार बना रही हैं।
दरअसल उचित जानकारी और अन्य सुविधाओं के अभाव में पहाड़ के किसान विभिन्न योजनाओं का उचित लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। मुख्य कृषि अधिकारी आरएल चंद्रावल के अनुसार जिले में बीते एक साल में कृषि और उद्यान विभाग की तारबाड़, पॉलीहाउस, फसली ऋण योजनाओं के लिए 29 हजार से अधिक किसानों ने बैंकों से अलग-अलग प्रकार के कर्ज लिए हैं। जिनमें से करीब 16 हजार किसान ही कर्ज वापस कर चुके हैं। जबकि बैंकों का बड़ा कर्ज नहीं चुकाने की वजह से अब तक 115 किसानों को राजस्व विभाग के माध्यम से कर्ज वसूली के नोटिस थमाए गए हैं। चंपावत जिले की 23 साधन सहकारी समितियों के 28508 सदस्यों में 4678 किसानों ने समितियों के माध्यम से 34.23 करोड़ रुपये कर्ज लिया है। जिला सहायक निबंधक पान सिंह राणा के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में 34.23 करोड़ रुपये के सापेक्ष मई तक महज 15.96 करोड़ रुपये के ऋण की वसूली हो सकी है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष 831 किसानों को आरसी जारी की गई थी, जिसमें से 102 काश्तकारों ने कर्ज जमा कराया। जबकि शेष अन्य को डिफाल्टर सूची में डाला गया है। इस बार भी जुलाई माह में बकाएदार काश्तकारों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
विज्ञापन



कर्ज माफी की आस में ले रहे हैं किसान ऋण
चंपावत। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से समय समय पर की जाने वाली किसानों की कर्ज माफी की घोषणा भी किसानों को कर्जदार बनाने में मददगार बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र ओली के अनुसार पर्वतीय क्षेत्र में अधिकांश किसान कर्ज माफी की आस से विभिन्न योजनाओं में किसान ऋण ले रहे हैं। आलम ये है कि आर्थिक रूप से संपन्न किसान भी कर्ज माफ होने की संभावनाओं के चलते सक्षम होने के बाद भी बैंकों के कर्ज की अदायगी से बच रहे हैं।
विज्ञापन




बीज खाद की सुविधा न मिलने से भी कर्जदारी बढ़ी
चंपावत। काश्तकार सुरेश तिवारी, कैलाश सिंह, नवीन सिंह, प्रहलाद सिंह आदि का कहना है कि किसानों को समय से बीज, खाद आदि की सुविधा न मिलने से भी कर्जदारी बढ़ रही है। इसके अलावा खेती किसानी के लिए खतरा बन रहे जंगली जानवरों से निजात दिलाने को ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है। कृषि उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए मंडियों का विस्तार किया जाना जरूरी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें