टनकपुर (चंपावत)।
रीवर ट्रेनिंग नीति के तहत किरोड़ा नाले में खनन को लेकर थ्वालखेड़ा में हुई बैठक में ग्रामीणों ने जबर्दस्त विरोध किया। कहा कि गांव की सुरक्षा को ताख पर रखकर खनन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने थ्वालखेड़ा-नायकगोठ के बीच पुल का निर्माण कराने की मांग उठाई। एसडीएम ने चैनलाइजेशन के तहत होने वाले खनन से फायदे गिनाए, लेकिन ग्रामीण नहीं मान्रे।
थ्वालखेड़ा पंचायत भवन में प्रधान सुंदर सिंह की अध्यक्षता एवं मान बहादुर पाल के संचालन में हुई बैठक में एसडीएम चन्याल ने कहा कि चैनलाइज किए जाने से नाले का प्रवाह गांवों की ओर फैलने के बजाय बीच में आएगा, जिससे गांवों की ओर कटाव का खतरा कम होगा। वहीं सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। उन्होंने कहा कि किरोडा नाला पहले ही बरसात में तबाही लेकर आता है। बचाव के उपाय किए जाने के बजाय गांव की सुरक्षा को ताख पर रखकर प्रशासन कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए खनन कराने का प्रयास कर रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खनन से एक ओर जहां बरसात में थ्वालखेड़ा, नायकगोठ गांव को खतरा पैदा होगा, वहीं ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को भी आवाजाही में जोखिम उठाना पड़ेगा। उन्होंने खनन के बजाय थ्वालखेड़ा-नायकगोठ गांव को जोड़ने के लिए पुल बनाए जाने की वकालत की।
बैठक में कोतवाल अरुण कुमार वर्मा, पटवारी प्रदीप जुकरिया, नायकगोठ के पूर्व प्रधान जीत सिंह, थ्वालखेड़ा पूर्व प्रधान विपिन जोशी, मदन सिंह महर, नारायण सिंह महर, त्रिलोक सिंह, पुष्कर जोशी, ब्लाक में सांसद प्रतिनिधि नरेश सकारी, पूर्व ब्लाक प्रमुख पुरुषोत्तम जोशी, जीवन सिंह, शोभा देवी, उप प्रधान सुंदरी देवी, सावित्री देवी, विशन सिंह महर, महिला मंगल दल अध्यक्ष प्रतिभा देवी, कमला देवी, गिरीश राय, चंदन बिष्ट, नवी चंद्र समेत काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।