चंपावत। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच की ओर से रविवार को आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने मौजूदा हालात पर कविता के जरिए उद्गार रखे। राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. बीसी जोशी ने झन-झन झनकृत है किसका स्वर के साथ काव्य गोष्ठी शुरू की। जन कवि डॉ. प्रकाश जोशी शूल ने मौजूदा सियासत के हालात को यूं बयां किया- नीति नहीं नीयत देखिए, रोग नहीं तबियत देखिए।
शिक्षक सामश्रवा आर्य ने देख तेरे इंसान की हालत, क्या हो गई भगवान, धुएं में उड़ रहा इंसान, नशाकर हो गया शैतान। सतीश पांडेय ने प्रेम से होली मनाओ आज सब, फणींद्र कुमार पांडेय ने यों बिखर गए रंग नगर-गांव-मुहल्ले कूचे, डॉ. कीर्ति बल्लभ सक्टा ने होली के त्योहार में मन को रंग लो खूब, शिक्षिका अंजू पांडेय ने बढ़ रही हैं बेटियां, पढ़ रही हैं बेटियां, डॉ. अजय कुमार रस्तोगी ने होली खेलन गए हैं कान्हा बृज में बृज की होरी और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. तिलक राज जोशी ने तुम गगन की नीलिमा, विस्तृत यहीं मैं मानता हूं कविता के जरिए अपने भाव रखे।