चंपावत। पहले एड्स (एक्वायर्ड इम्युनो डेफिशिएंसी) से पीड़ित पति को खोया और फिर कुछ समय बाद सास-ससुर ने घर से निकाल दिया। जिले के एक ग्रामीण इलाके में 31 साल की महिला और उसके बच्चे को इस त्रासदी से जूझना पड़ा। विपरीत परिस्थितियों से जूझने के बाद भी एचआईवी (ह्युमन इम्युनो डेफिशिएंसी वायरस) के साथ जी रही यह महिला अब वह छिटपुट काम कर अपना जीवन स्वाभिमान से काट रही है।
जिले के नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र का 34 वर्ष का एक युवक घर से कई हजार किलोमीटर दूर मुंबई में प्राइवेट वाहन चलाता था। लेकिन कुछ समय बाद वह एचआईवी की चपेट में आ गया। एचआईवी ग्रस्त होने के बाद युवक का इलाज भी चला। दवाओं को लेने के चलते घर वालों को बस इतना पता चला कि युवक किसी रोग से पीड़ित है। कुछ समय बाद 2015 में एड्स पीड़ित की मौत हो गई। पति की मौत के कुछ माह बाद बीमार होने पर पत्नी इलाज के लिए अस्पताल आई, तो उन्हें व उनके बच्चे को भी एचआईवी (ह्युमन इम्युनो डेफिशिएंसी वायरस) संक्रमित होने का पता चला। सास-ससुर को जब बहू व पोते के एचआईवी से ग्रस्त होने की जानकारी लगी, तो सहारा देने के बजाय उन्होंने बहू को पोते सहित घर से बाहर निकाल दिया।
पति की मौत और फिर बेघर किए जाने से परेशान महिला ने कुछ दिन गांव में ही इधर-उधर रहकर काटे। इसकी भनक स्वास्थ्य विभाग के फील्ड वर्कर्स को लगी। सहायक मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएम) डा.रश्मि पंत ने महिला से मुलाकात की। स्वास्थ्य विभाग ने डीएम डॉ.अहमद इकबाल की मदद से महिला के लिए अलग से बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाला) राशनकार्ड बनवाया। साथ ही तीन बार में महिला को रेडक्रास से कुल मिलाकर 25 हजार रुपये की मदद दी गई। महिला और उनके 6 वर्षीय बच्चे का हल्द्वानी में इलाज चल रहा है।
अब यह ग्रामीण महिला सिलाई-बुनाई और अन्य छिटपुट काम कर अपना जीवन स्वाभिमान से काट रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भी महिला की हिम्मत के चलते प्रशासन के सहयोग से महिला की मदद करने की ठानी है। एसीएमओ डॉ.पंत का कहना है कि परिजनों को समझाने का प्रयास नाकाम होने के बाद इस साल मार्च में महिला का राशनकार्ड बनाया गया। और अब महिला को आवास योजना का लाभ दिलाने के अलावा स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की कवायद चल रही है। एसीएमओ का कहना है एड्स को लेकर लोगों की गलतफहमी को दूर करने के लिए प्रयास किया जाएगा।
इनसेट....एक
ऐसे फैलता है एचआईवी वायरस
1.संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध बनाने से। मुंह में छाले या मसूड़ों में खून बहने से।
2.एड्स के रोगी पर प्रयोग किए इंजेक्शन को दूसरे व्यक्ति के शरीर में लगाने से।
3.एड्स संक्रमित खून प्राप्त करने से।
4.एड्सग्रस्त मां के द्वारा जन्म लेने वाले शिशु को। एड्सग्रस्त मां के दूध से।
इनसेट..........दो
ऐसे नहीं होता एचआईवी संक्रमण
1.एड्स रोगी से हाथ मिलाने, चूमने या पकड़ने से।
2.एड्स रोगी के साथ रहने या खाना खाने से।
3.छींकने या खांसने से।
4.मच्छर के काटने से।