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साढ़े 12 लाख की प्रीमियम दी, मगर नहीं मिला एक भी रुपये का मुआवजा

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चंपावत के मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती। - फोटो : CHAMPAWAT
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर इस जिले में किसानों की जेब कट रही है। रबी और खरीफ की फसल में बीते साढ़े तीन साल में 9291 किसान बीमा करा चुके हैं लेकिन फसल का नुकसान होने के बावजूद किसी भी किसान को एक भी रुपया क्षतिपूर्ति के रूप में नहीं मिला है। जबकि इसके लिए उन्होंने 12 लाख 51 हजार रुपये की प्रीमियम राशि भी दी है।
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हर साल खेती को नुकसान से बचाने के लिए बेहद मामूली प्रीमियम पर 2016 की खरीफ सीजन से पीएम फसल बीमा योजना लागू की गई। इस योजना में रबी फसल में गेहूं और खरीफ में धान और मडुवे को बीमित फसल की श्रेणी में रखा गया है। चंपावत जिले में करीब 7535 हेक्टेयर गेहूं, 7100 हेक्टेयर धान और 4847 हेक्टेयर में मडुवे की खेती होती है।
खरीफ की चार फसलों में कुल 4746 किसानों ने 5.62 लाख रुपये की प्रीमियम देकर 1123.22 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा कराया। जबकि रबी की तीन फसलों में 4545 किसानों ने 6.89 लाख रुपये की प्रीमियम देकर 1198.72 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा कराया। मगर अब तक एक भी किसान को मौसमी मार के बावजूद कोई भी क्षतिपूर्ति नहीं मिली है। किसान हयात सिंह, भवान सिंह, दीवान, शिशुपाल सिंह सहित कई किसानों का कहना है कि आवेदन के बावजूद उन्हें कभी मुआवजा नहीं मिला।
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तहसील आधार पर बीमा के लाभ का प्रावधान
चंपावत। पीएम फसल बीमा योजना का लाभ तहसील में होने वाले नुकसान के आधार पर दिए जाने का प्रावधान है। जिले में चंपावत व पूर्णागिरि तहसील, लोहाघाट तथा बाराकोट व पाटी तहसील तीन इकाइयां बनाई गई हैं।
इन पांच आधारों पर मिलता है फसल बीमा का लाभ:
1.75 प्रतिशत एरिया में बुआई न होने की स्थिति में बीमा धन की 25 प्रतिशत रकम।
2.बुआई के बाद मौसम की मार से 50 प्रतिशत नुकसान होने पर बीमा धन की 25 फीसदी राशि।
3.कटाई से पूर्व होने वाले नुकसान पर।
4.ओलावृष्टि, भूस्खलन या जलभराव जैसी स्थानीय आपदा से होने वाले नुकसान पर।
5.फसल की कटिंग के बाद खेत में फसल सूखाने के दौरान बारिश, चक्रवात से होने वाले नुकसान की भरपाई।
पीएम फसल बीमा योजना में खरीफ और रबी की फसल में अब तक कुल 9291 किसानों ने बीमा कराया। राजस्व, कृषि विभाग के अलावा बीमा कंपनी की टीम के सर्वे के बाद किसान को बीमा की रकम दिए जाने का प्रावधान है लेकिन नुकसान के सर्वे के बाद तकनीकी आधार पर उन्हें बीमा के लिए अपात्र पाया गया। इससे अब तक जिले में किसी को भी बीमा राशि नहीं मिल सकी। राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी,
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चंपावत।
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