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टांण अस्पताल में 27 माह से डॉक्टर नहीं

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रीठा साहिब (चंपावत)। लधिया घाटी के दूरस्थ टांण क्षेत्र सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग टांण में अस्पताल होते हुए भी इसके लाभ से वंचित हैं। 27 माह से डॉक्टर नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए यहां के लोग 24 किलोमीटर दूर रीठासाहिब आने को मजबूर हैं।
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लधिया घाटी से लगे गांव टांण में राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) है। लाखों रुपयों की लागत से बना यह अस्पताल काफी वक्त से किसी काम का नहीं है। टांण, साल, ककनई, खटोली, वैला, मछियाड़ सहित एक दर्जन से ज्यादा गांव इस अस्पताल पर आश्रित हैं। इस अस्पताल में दिसंबर 2016 से डॉक्टर नहीं है। यहां के डॉक्टर को लोहाघाट संबद्ध किया गया है। इसके चलते अस्पताल में लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल फार्मेसिस्ट और वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहा है।

अस्पताल में न तो बिजली का कनेक्शन है और न ही यहां पहुंचने के लिए कायदे का रास्ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल मरीजों को इलाज की सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। मरीजों को मामूली इलाज के लिए यहां से करीब 48 किलोमीटर (24 किमी आना और 24 किमी जाना) की अतिरिक्त दूरी तय कर रीठा साहिब के अस्पताल की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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ग्राम प्रधान भागीरथी गड़कोटी, उप प्रधान आनंदी देवी, भोला दत्त गड़कोटी, रामदत्त जोशी, गंगा जोशी, खीमानंद गड़कोटी आदि विभिन्न मंचों से डॉक्टर की तैनाती की मांग करते आ रहे हैं लेकिन आज तक न तो संबद्ध डॉक्टर को वापस भेजा गया और न ही किसी अन्य डॉक्टर की तैनाती की गई है। अब ग्रामीणों ने डॉक्टर की जल्द तैनाती नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

डॉक्टरों की कमी के चलते टांण अस्पताल के डॉक्टर मंजीत सिंह को लोहाघाट संबद्ध किया गया था। उन्हें टांण भेजा जाना तो मुमकिन नहीं है। अस्पतला के लिए नए डॉक्टर की मांग की गई है। डॉ. आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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