चंपावत। जिले में घराटों की संख्या में गिरावट आ गई है। दो साल के भीतर चंपावत में एक भी नए घराट का निर्माण नहीं किया गया है। उरेडा परियोजना ने 2015-16 में 24 घराट स्थापित किए थे, इनमें से कुछ ही घराट चालू हालत में है।
उरेडा परियोजना के माध्यम से डेढ़ लाख रुपये लागत से एक घराटों का निर्माण किया जाता है। विभाग ने जिले में 60 घराटों का निर्माण किया है। इसमें से 10-12 ही घराटों से ग्रामीणों को लाभ मिल रहा है। उरेडा के माध्यम से लाभार्थियों को अंशदान में घराटों का निर्माण कराया जाता है। घराट तैयार करने में लाभार्थियों को घराट घर, टैंक, गूल तैयार किया जाता है।
बरसात में भी कई घराट हुए क्षतिग्रस्त
चंपावत। जिले में तेज बारिश के दौरान अधिकांश घराट क्षतिग्रस्त हो गए है। बारिश में जल स्तर बढ़ने से घराट और गूल टैंक क्षतिग्रस्त हो गए है। घराट की मरम्मत नहीं होने से वीरान पड़ गए है।
2015-16 में इन गांवों में बने घराट
जिले में 2015-16 में मंगललेख, ककनई, खटोली, अमोड़ी, कानीकोट, चल्थियां, तोला, रैकुड़ी, जैगांव, बडोली, पल्सों, कोट अमोड़ी, बडोली, गहतोड़ा, धूनाघाट, सैंदर्क, मौराड़ी, रैघांव, नौमाना, चिलनयिां, सिब्योली आदि में 24 घराटों का निर्माण कराया गया था।
जिले में दो साल से घराटों का निर्माण नहीं किया गया है। 2015-16 में 24 घराट लगाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में घराटों की संख्या घट रही है। वर्तमान में 10-12 घराट ही चालू हालत में हैं।
-मनोहर जंगपागी, अवर अभियंता, उरेडा, चंपावत।