चंपावत। स्वांला में बुधवार को हुए हृदय विदारक सड़क हादसे के गवाह बने स्थानीय ग्रामीणों के हलक से एक भी निवाला नहीं उतरा। हालांकि वाहन दुर्घटना में मारे गए दस लोगों में से कोई भी आसपास के गांवों का नहीं है, लेकिन गांव के जिन लोगों ने भी बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र में दूर दूर तक बिखरी लाशों और मानव अंगों को देखा वह अपनी सुध बुध खोए हुए हैं। क्षेत्र के कई घरों में बुधवार को चूल्हा नहीं जला।
वाहन दुर्घटनाओं के लिए अभिशप्त हो चुके स्वांला मंदिर के दुर्घटनाग्रस्त स्थल में बृहस्पतिवार को दूसरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। अलबत्ता राष्ट्रीय राजमार्ग में चलने वाले वाहनों के चालक और यात्री स्वांला मंदिर के समीप रुक-रुक कर दुर्घटनाग्रस्त स्थल को देखते रहे। ग्रामीण दीपक सिंह बोहरा, उमेश चंद्र, दिनेश चंद्र, खिलानंद, लीलाधर आदि का कहना है कि राजमार्ग में स्वांला बैंड से अमोड़ी के खेतखोला तक करीब चार किलोमीटर का क्षेत्र वाहन दुर्घटना के लिए अभिशप्त हो चुका है। इस चार किलोमीटर की दूरी में वाहनों को खाई में गिरने से बचाने के लिए कोई भी उपाय नहीं किए गए हैं। जिस कारण वाहन दुर्घटना होने पर घायलों की तुलना में मरने वालों की संख्या ज्यादा होती है।
इस क्षेत्र में कभी भी वाहन दुर्घटना की जानकारी होने पर सबसे पहले आसपास के ग्रामीण ही सहायता के लिए पहुंचते हैं। जिसके चलते कई बार प्रशासन की ओर से क्षेत्र के युवाओं को सम्मानित भी किया जाता है। लेकिन बीते कल हुई दुर्घटना की जानकारी ग्रामीणों को प्रशासन के मौके पर पहुंचने के बाद हो पाई।
डेढ़ सौ से अधिक मौतें देख चुके हैं टीकाराम
चंपावत। अमोड़ी के सामाजिक कार्यकर्ता टीकाराम भट्ट अब तक स्वांला बैंड से खेतखोला के बीच हुए विभिन्न सड़क हादसों में डेढ़ सौ से अधिक लोगों की मौत को अपनी आंखों से देख चुके हैं। वह बताते हैं कि दस फरवरी 1952 को स्वांला के समीप पीएसी का वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना को उन्होंने स्वयं देखा था। जिसमें आठ जवान मौके पर ही और शेष दस जवानों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। वह उस समय कक्षा चार में पढ़ते थे तथा परिजनों के साथ वह भी दुर्घटनाग्रस्त स्थल में गए थे।
कई वाहन दुर्घटनाओं के साक्षी हैं पूर्व सैनिक रेवाधर
चंपावत। कोट अमोड़ी के पूर्व सैनिक रेवाधर भट्ट का कहना है कि वह क्षेत्र में कई वाहन दुर्घटनाओं के साक्षी रहे हैं। नवंबर 1985 में स्वांला और खेतखोला के बीच हुए ट्रक दुर्घटना में आठ लोग मारे गए थे। यह सभी लोग स्वांला में रामलीला देखकर लौट रहे थे। ट्रक चालक ने इस दौरान 25 ग्रामीणों को अपने केबिन में चढ़ा लिया था। वाहन कुछ ही दूरी तय करने के बाद खेतखोला में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उनका कहना है कि अधिकांश दुर्घटनाएं सड़क तंग होने और चालकों के नशा करने से हो रही हैं।
सड़क पर बिखरे मलबे से वाहन दुर्घटना की आशंका
चंपावत। राष्ट्रीय राजमार्ग में कार्यदायी संस्था की ओर से सड़क पर यत्र तत्र बिखेरे गए मलबे से वाहन दुर्घटनाओं की आशंकाएं बढ़ रही हैं। अमोड़ी की ग्राम प्रधान रेखा भट्ट का कहना है कि मार्ग में कई स्थानों पर भारी भरकम मशीनें, डोजर, बुलडोजर, पोकलैंड, स्टोन क्रेकर, लोडर, जेसीबी के साथ ही बड़ी संख्या में डंपर सड़क के किनारे जहां तहां खड़े कर दिए जाने से भी दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है।
रात भर चलने वाले भारी वाहनों से ग्रामीण परेशान
चंपावत। सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वरी दत्त भट्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग में रात में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध केवल कागजी औपचारिकता मात्र है। मार्ग में रात भर चलने वाले भारी वाहनों के शोरगुल से ग्रामीण परेशान हैं। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन को राजमार्ग में रात्रि के दौरान के वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध के निर्देशों का सख्ती से पालन कराए।