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रायनगर चौड़ी गांव में सफेद हाथी बनी हाईड्रम योजना

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एक ओर जहां पानी के बगैर किसानों की खेती लगातार सूखने की कगार में पहुंचती जा रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय उदासीनता के चलते पानी होते हुए भी लोगों को सिंचाई योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी बानगी लोहाघाट से लगे मात्र एक किमी दूरी पर स्थित रायनगर चौड़ी गांव में देखने को मिलती है।
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यहां लघु सिंचाई विभाग द्वारा संचालित हाइड्रम योजना सफेद हाथी बनी है। योजना की ओर विभाग की अनदेखी के बाद किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। योजना के मूल स्रोत में भरपूर पानी तो है, लेकिन यहां से मशीन तक पानी पहुंचाने वाली गूल कई जगह क्षतिग्रस्त है। आलम यह है कि विभाग की ओर से कई वर्षों पूर्व बनाए गए टैंक में रिसाव होने के साथ गूल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा कई बार मरम्मत के नाम पर लीपापोती कर ठेकेदारों से सांठगांठ कर सरकारी धन को ठिकाने लगा दिया गया, लेकिन गूल की हालत जस की तस बनी हुई है। गूल में कई जगह इतने गड्ढे बने हैं, उससे एक बूंद भी पानी मशीन तक नहीं पहुंच पाता है। पानी के अभाव में किसानों की खेती बर्बाद हो गई है। ग्रामीणों द्वारा निजी संसाधनों से लोहावती नदी से पानी लिफ्ट कर टैंक में पॉलिथीन बिछाकर उसमें पानी भरा जाता है, जिसके बाद उस पानी को सिंचाई के रूप में प्रयोग में लिया जाता है।

उदासीनता के चलते सिंचाई योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा
पानी के बगैर सूखने के कगार पर पहुंची किसानों की खेती

घटिया गुणवत्ता के चलते रिस जात है पानी
लोहाघाट (चंपावत)। गांव के प्रगतिशील युवा किसान महेश चंद्र राय का कहना है कि उनके द्वारा कई बार विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों के सम्मुख इस समस्या को रखा है, लेकिन किसानों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता है। उन्होंने अपने खर्च से टैंक में पॉलिथीन बिछाकर नदी से पानी लिफ्ट कर सिंचाई की व्यवस्था की है। हाइड्रम योजना की गूल में पूर्व में कुछ काम कराया गया, कार्य की घटिया गुणवत्ता के कारण गूल से सारा पानी रिस जाता है। इससे पानी मशीन तक नहीं पहुंच पाता है।
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हाइड्रम चालू न होने से किसान परेशान
लोहाघाट (चंपावत)। ग्रामीण सचिन राय का कहना है कि हाइड्रम योजना के चालू न होने के कारण किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पानी के अभाव में किसानों के लगातार खेत सूख रहे हैं। हाइड्रम योजना चालू होने से किसानों को इसका काफी लाभ मिलता।


थोड़े से प्रयास से सुचारु हो सकती है योजना
लोहाघाट (चंपावत)। ग्रामीण कमलेश राय का कहना है कि ग्रामीणों के खेतों की सिंचाई के लिए हाइड्रम योजना बनाई गई थी लेकिन विभाग द्वारा इसका सही ढंग से रखरखाव न करने के कारण लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। क्षतिग्रस्त गूल की पूरी पारदर्शिता के साथ मरम्मत करने से थोड़े ही प्रयास में योजना सुचारु रूप से चालू हो सकती है।


जिला योजना में रखा जाएगा प्रस्ताव
लोहाघाट (चंपावत)। लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत कुमार का कहना है कि विभाग में गूलों की मरम्मत के लिए राशि की कोई व्यवस्था नहीं होती है। योजना ठप है, उनके संज्ञान में अभी आया है। योजना की मरम्मत के लिए जिला योजना में प्रस्ताव रखा जाएगा।
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